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7/20/2019

7/20/2019

सहकारिता का अर्थ, महत्व (भूमिका)

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का https://www.khaskhabr.com में,  भारत में सहकारिता आन्दोलन की शुरूआत बीसवीं सदी के प्रारंभिक वर्षो में हुई थी। उस समय देश में अकाल पड़ा था। जिसके परिणामस्वरूप किसान गरीब ॠण के दुष्चक्र में फँस थे। भारत जैसे आर्थिक रूप से पिछड़े हुए देश में सहकारिता का महत्व अत्यधिक है।
सहकारिता का अर्थ

सहकारिता का अर्थ 

सहकारिता से अभिप्राय सह+कार्य अर्थात मिलकर कार्य करने से है। शाब्दिक दृष्टि से सहकारिता का अर्थ मिलजुलकर काम करना है। सहकारिता के अन्तर्गत दो या दो से अधिक साथ मिलकर काम करने वाले व्यक्ति आते है। कोई भी मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति अकेले नहीं कर सकता। उसे अन्य लोगों के सहयोग की आवश्यकता जरूर होती है एक-दूसरे को सहयोग करने से ही सहकारिता का जन्म होता है।
सहकारिता के संस्थागत आधार को जानने के लिए सहकारिता की परिभाषा को जान लेना जरूर है।

सहकारिता की परिभाषा 

अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार; " एक सहकारी समिति समान आर्थिक कठिनाइयों का सामाना करने वाले ऐसे व्यक्तियों का संगठन है जो समान अधिकारों तथा उत्तरदायित्वों के आधार पर स्वेच्छापूर्वक मिलकर उन कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास करते है।"
एम. प्लंकेट के शब्दों मे; "सहकारिता संगठन द्वारा प्रभावशाली बनाई गई आत्म सहायता है।"
सहकारिता के लाभ को स्पष्ट करने हेतु अब हम सहकारिता के महत्व को जानेंगे।
सहकारिता का महत्व

सहकारिता का महत्व (भूमिका)

सहकारी आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य कृषकों, ग्रामीण कारीगरों, भूमिहीन मजदूरों एवं समुदाय के कमजोर तथा पिछड़े वर्गों के कम आय वाले और बेरोजगार लोगों को रोजगार, साख तथा उपयुक्त तकनीकी प्रदान कर अच्छा उत्पादक बनाना है। सहकारिता का महत्व इस प्रकार है......
1. आर्थिक विकास में सहायक 
सामूहिक रूप में किए उत्पादन वृध्दि की संभावनाएं अधिक होती है। सहकारी संस्थाएं कृषकों को कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराती है। सहकारिता के कारण कृषि लागत में कमी आई है तथा बेरोजगारी पर अंकुश भी लगा है।
2. धन का सदुपयोग 
सहकारिता समितियां कृषकों को कृषि कार्यों हेतु ही ॠण देती है। किसान साहूकारों और महाजनों से विवाह उत्सव और मृत्यु भोज आदि कार्यों के लिए अधिक ब्याज दर पर ऋण लेते थे लेकिन सहकारी सहमितियां किसान को कृषि कार्यों हेतु ही ऋण देती है इस तरह धन का सदुपयोग होता है।
3. सामाजिक विकास में सहायक 
सहकारिता से लोगों में सहयोग की भावना संचार हुआ है। वे मताधिकार तथा पदों एवं अधिकारों-कर्तव्यों के महत्व को समझने लगे है। सहकारिता से सामाजिक चेतना मे वृध्दि हुई है।
4. सामाजिक बुराईयों को दूर करने में सहायक
सहकारिता आन्दोलन ने अशिक्षा, अज्ञानता, अंधविश्वास तथा बेरोजगारी की समस्याओं को दूर करने में अपना बहुत बड़ा योगदान दिया है।
5. शिक्षा और प्रशिक्षण
सहकारिता ने औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ सहकारी नियमों की जानकारी, संगठन की कला और सामुदायिक शिक्षा जैसी अनौपचारिक शिक्षा की व्यवस्था सहकारिता आन्दोलन ने की है।
सहकारिता
इन सब के अतिरिक्त सहकारिता का प्रजातांत्रिक मूल्यों के विकास, नैतिक गुणों का विकास,  मध्यस्थों के शोषण से मुक्ति, राजनीतिक चेतना के विकास मे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्पष्ट होता है की सहकारी समितियां ग्रामीण पुनर्निर्माण एवं विकास का आधार रही है।
अगर आपका सहकारिता से सम्बन्धित या इस लेख से सम्बन्धित किसी भी प्रकार का कोई विचार है तो नीचे comment कर जरूर बताएं।
7/20/2019

जनजाति का अर्थ, परिभाषा और विशेषताएं

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का https://www.khaskhabr.com मैं, जैसा की आप सब जानते है हमारा भारत विविधताओं वाला देश है, यहाँ अनेक जातियाँ- जनजाति, और अनेक धर्मों और भिन्न भाषा बोलने वाले समूह निवास करते है। आज के इस लेख मे हम जनजाति समाज के बारें मे विस्तार से चर्चा करेंगे।
जनजाति समाज

जनजाति का अर्थ 

भारत के विभिन्न क्षेत्रो में ऐसे मानव-समूह निवास करते है जो आज भी सभ्यता तथा संस्कृति से आपरिचित है। जो सभ्य समाजों से दूर जंगल, पहाड़ो अथवा पठारी क्षेत्रों मे निवास करते है। इन्ही समूहों को जनजाति, आदिम समाज, वन्य जाति, आदिवासी आदि नामों से जाना जाता है।
जनजाति समाज की संस्कृति अन्य समाजों से भिन्न होती है। उनके रीति-रिवाज, विश्वास, भाषा और स्थान अलग-अलग होते है। यदि व्यक्तियों का सामाजिक स्तर समान न हो तब भी उनमें स्तरीकरण एवं विलगता दिखाई नही पड़ती।
जनजाति के अर्थ के बाद अब हम जनजाति की परिभाषा और जनजाति की विशेषताओं के बारें मे चर्चा करेगें।
जनजाति

जनजाति की परिभाषा 

 राल्फ लिटंन के अनुसार= " सरलतम रूप मे जनजाति ऐसी टोलियों का एक समूह है। जिसका एक सानिध्य वाले भूखण्ड़ो पर अधिकार हो और जिनमें एकता की भावना, संस्कृति में गहन सामान्यतः निरंतर संपर्क तथा कतिपय सामुदायिक हितों में समानता से उत्पन्न हुई हो।
डाॅ. घुरिये के अनुसार= "भारत मे जनजाति पिछड़े हुए हिन्दू है।"
हाॅबेल के शब्दों मे= "जनजाति या प्रजाति विशिष्ट जननिक रचना के फलस्वरूप उत्पन्न होने वाले शारीरिक लक्षणों का एक विशिष्ट संयोग रखने वाले अंतः संबंधित मनुष्यों का एक वृहत समूह मजूमदार के अनुसार= "कोई जनजाति परिवारों का ऐसा समूह है जिसका एक समान नाम है जिसके सदस्य एक निश्चित भूभाग पर निवास करते है तथा विवाह व व्यवसाय के संबंध मे कुछ निषेधाज्ञाओं का पालन करते है।
विभिन्न विद्वानों द्वारा दी गई जनजाति की परिभाषाओं के बाद अब हम जनजाति की विशेषताओं के बारें मे चर्चा करेंगे।
जनजाति समाज

जनजाति की विशेषताएं 

1. प्रत्येक जनजाति के एक नाम
सभी जनजाति समूह के अलग-अलग नाम होता है जिसके द्वार उसे पहचाना जाता है।
2. सामान्य भू-भाग 
जनजातियों का संबंध निश्चित भू-भाग से होता है निश्चित भू-भाग में निवास करने से उनमें सामुदायिक भावना का विकास होता है।
3. जनजाति परिवारों का समूह है
एक जनजाति में समान लक्षण वाले परिवारों का समूह होता है। कुछ परिवारों से मिलकर एक नातेदारी समूह का निर्माण होता है और इसी तरह नातेदारी समूहों के अंत: संबंधो के आधार पर जनजाति समूह विकसित हो जाता है।
4. सामान्य भाषा
जनजाति की अपनी एक सामान्य भाषा होती है जिसका उपयोग वे अपने विचारों के आदान-प्रदान के लिए करती है।
5. शिक्षा का अभाव 
जनजाति समूह मे शिक्षा का आभाव बहुत ही अधिक होता है। भारत सरकार ने शिक्षा के आभाव को दूर करने के लिए अनेक दम भी उठाए है।
6. अंतर्विवाह
जनजातियों मे अंतर्विवाह का पिरचनल से एक जनजाति के लोग दुसरी जनजाति मे विवाह नही करते।
7. आत्म-निर्भरता 
जनजाति समूह मे आत्म-निर्भरता पाई जाती है भौतिकता के दौर मे जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करने मे जनजाति समूह स्वयं सक्षम होते है।
दोस्तो जनजाति से सम्बन्धित या फिर इस लेख से सम्बन्धित आपका किसी प्रकार का कोई विचार है तो नीचे comment कर जरूर बताए।

7/16/2019

7/16/2019

Raksha bandhan message in hindi 2019

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का मेरे blog मे सबसे पहले तो सभी को मेरे और से दिल की गहराईयों से रक्षा बंधन की हार्दिक-हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें। आज मे लेकर आया हूं आपके लिए Raksha bandhan message in hindi and raksha bandhan shayari जिन्हें आप अपने दोस्तो एवं भाई-बहनों को WhatsApp, Facebook आदि पर भेज कर रक्षा बंधन की शुभकामनायें दे सकते है और अपने WhatsApp status पर भी डाल सकते है तो चलिए पढ़ते है---
raksha bandhan shayari in hindi
सावन भाई-बहन के रिश्ते को फिर से हरा-भरा करने,
पूर्णिमा के चाँद के साथ आया है,
राखी भाई की वचनबद्धता और बहन की ममता,
दुलार अपने संग लाया है।
रक्षा-बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं।
Raksha bandhan message in hindi.
Rishta hum bhai bahan ka,
Kabhi mitha kabhi khatta,
Kabhi ruthna kabhi manana
Kabhi dosti kabhi jhgda
Kabhi rona aur kabhi hasna
Yeh rishta hai pyaar ka
Sabse alag sabse anokha.
Happy Rakhi bandhan 2019.
Raksha bandhan message image
raksha bandhan shayari in hindi.
हमे दूर भले किस्मत कर दे,
अपने मन से न जुदा करना,
सावन के पावन दिन भैया,
बहना को याद करना।
Raksha bandhan message in hindi.
CHANDAN ki lakri foolon ka haar.
August ka mahina savan ki phuhar
Bhaiya ki kalai bahen ka pyar
Mubark ho ap ko Rachabandan ka tyuhar.
Happy raksha bandhan 2019.
raksha bandhan shayari in hindi.
कच्चे धागों से बनी पक्की डोर है राखी,
प्यार और मीठी शरारतों की होड़ है राखी,
भाई की लंबी उम्र की दुआ है राखी,
राखी की शुभ कामनायें।
Happy raksha bandhan
raksha bandhan shayari in hindi.
Aaj kalayi kyun hai suni si
Mithai bhi aaj phiki si lagti hai
Mere payare Bhaiya
Missing You on this auspicious occasion of Raksha Bandhan.
Happy raksha bandhan.
raksha bandhan shayari in hindi.
चंदन का टीका रेशम का धागा सावन की सुगंध बारिश कि फुहार, भाई की उम्मीद बहिना का प्यार मुबारक हो आपको "रक्षा बंधन" का त्योहार।
रक्षा-बंधन की हार्दिक शुभकामएं।
Raksha bandhan message in hindi.
Khuda Kare Tujhe Khushiyan Hazaar Mile,
Mujhse Bhi Achcha Yaar Mile,
Meri Girlfriend Tujhe Bandhe RAKHI,
Aur Ek AUR Behan Ka Pyaar Mile..
Happy rakhsha bandhan 2019.
raksha bandhan shayari in hindi.
आया है एक जन्श्र का त्यौहार, चलो मनाये रक्षा का ये त्यौहार।
रक्षा बंधन मुबारक हो।
रक्षा बंधन की शुभकामनाएं
Raksha bandhan message in hindi.
Uska husn gaya kaleja cheer,
Nayano se barbas chhuta ek teer
Vo muskraai :), paas aai boli,
Rakhi Bandh waale mere veer.
Happy rakhsha bandhan.
raksha bandhan shayari in hindi.
प्रीत के धागों के बंधन में स्नेह का उमड़ रहा संसार,
सारे जग में सबसे सच्चा होता है भाई बहन का प्यार,
इस सच्चे प्यार को ही दर्शाता है यह राखी का पावन त्यौहार।
रक्षा बंधन की शुभकामनाये।
Raksha bandhan message in hindi.
Aaj Din Bahut Khaas Hai,
Behan KE Liye Kuch Mere Paas Hai,
Uske Sukun Ki Khaatir O Behnaa..
Tera Bhaiya Hamesha Tere Aas-Paas Hai !!
Happy Rakhsha Bandhan 2019.
raksha bandhan shayari in hindi.
मुकद्दर में मेरे इतना प्यार लिखा है…
उस खुदा का शुक्रिया अदा मै कैसे करूं….
सोचता हूं दीदी आपकी शान ए सौकत में….
अल्फाज का गुल्दस्ता आपको पेश करूं...
हैप्पी रक्षाबंधन।
Raksha bandhan message in hindi.
Khush kismat hoti hai wo behan
Jiske sir par bhai ka haath hota hai
Har pareshaani mein uske saath hota hai
Ladna jhagadna fir pyaar se manana
Tabhi to is rishte mein itna pyaar hota hai
Happy Raksha Bandhan 2019.
raksha bandhan shayari in hindi.
सावन की बौछारों के बीच सुंदर पुष्प हैं खिला,
भाई बहन के रिश्ते की हैं यह पावन बेला,
घर में हैं ऐसी चहल पहल जैसे कोई मेला,
बहनों के लिए गीता गा रहा हैं भाई अलबेला।
हैप्पी रक्षाबंधन।
Happy rasksha bandhan image
Raksha bandhan message in hindi.
Aaap ko Bill Gates ki Safaalta,
Mittaal ka Khaazana,
Aur Monaalisa ki muskuraahat mile,
Shubh Raksha Bandhan 2019.
raksha bandhan shayari in hindi.
मेरी प्यारी बहिना, खुश तू सदा ही रहना,
हर वक़्त मिल-जुल के रहने का वादा है,
तेरी राखी है स्वीकार और वादा है रक्षा का,
मेरी बहिना तू और तेरी यादें हैं मेरे लिये एक अमूल्य गहना.
राखी की शुभकामनायें।
Raksha bandhan message in hindi.
Aaj ka din bahut hi khaas hain,
Behna ke liye kuch mere pas hai,
Tere sukoon ki khaatir o behna..
Tera bhaiya humesha tere sath hai
Happy Raksha Bandhan 2019.
raksha bandhan shayari in hindi.
मेरा भाई चंदा से भी प्यारा,
मेरा भाई सूरज से भी न्यारा।
भाई ने दिया इतना प्यार,
ये जीवन मैने उसपर वारा।
माँ ने दिया जीवन मगर,
तुमने ही उसे संवारा।
राखी के दिन दुआ है मेरी,
खुशियों से भर जाये उसका जहां सारा।
हैप्पी रक्षाबंधन।
Raksha bandhan message in hindi.
Chawal Ki Khushbu Or Kesar Ka Singar
Rakhi, Tilak, mithai Or Khusiyo Ki Bauchar
Behno Ka Sath Or Besumar Pyar
MUBARAK Ho Apko Raakhi Ka Tyohar.
Happy rasksha bandhan 2019.

7/14/2019

7/14/2019

घरेलू हिंसा पर निबंध

घरेलू हिंसा एक व्यापक सामाजिक समस्या है। भारतीय समाज में पितृसत्तात्मक व्यवस्था के कारण महिलाएं दोयम दर्जे पर  ही रहती है। समाज समयानुसार जैसे-जैसे प्रगति पर उन्मुख हो रहा है वैसे-वैसे समाज में घरेलू हिंसा की प्रवृति भी बढ़ती जा रही है। आज के इस लेख मे हम घरेलू हिंसा पर एक निबंध लिखेंगे जिसमे हम घरेलू हिंसा कारणों के बारें में भी जानेगें।
घरेलू हिंसा मारपीट

घरेलू हिंसा का अर्थ

राज्य महिला आयोग के अनुसार ""कोई भी महिला यदि परिवार के पुरूष द्वारा की गई मारपीट अथवा अन्य प्रताड़ना से त्रस्त है तो वह घरेलू हिंसा की शिकार कहलाएंगे। घरेलू हिंसा वैसे तो परिवार में उत्पन्न किसी भी तरह के लड़ाई झगडें को कहा जा सकता है लेकिन घरेलू हिंसा का अधिकांश महिलाऐ ही शिकार होती है इसलिए हम इस लेख मे महिलाओं की ही अधिक बात करेंगे।
घरेलू हिंसा

घरेलू हिंसा पर निबंध (Essay on Domestic Violence in Hindi)

घरेलू हिंसा में ऐसा किसी भी तरह का व्यवहार शामिल है जिसमें महिला के स्वास्थ्य, सुरक्षा, जीवन तथा सुख से रहने की इच्छा का हनन होता हो। घरेलू हिंसा से बचाने के लिए भारत सरकार ने घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 (domestic violence act 2005) का निर्माण भी किया है। इस अधिनियम को 26 अक्टूबर, 2006 से लागू किया गया है। घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 को महिला आयोग एवं विकास द्वारा संचालित (चलाया जाता है) किया जाता है।
लैंगिक असमानता के व्यवहारिक रूपों को लेकर महिलाओं के विरूध्द क्रूरता महिलाओं पर अत्याचार की अनेक घटनाएं घटित होती रहती हैं। घरेलू हिंसा के कारण अधिकतर मामले फाँसी लगाने के होते है। घरेलू हिंसा का सबसे मुख्य कारण दहेज रहा है, दहेज भौतिक सुख-सुविधाएं बढ़ने के साथ-साथ दहेज लोभियों की मांग भी बढ़ती जा रही है। मौखिक रूप से या भावनात्मक रूप से भी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है जैसे " उपेक्षा कर देना, भेदभाव करना या दहेज न लाने हेतु उसे अपमानित करना, पुत्री का जन्म होने पर उसे ताने देना या अपमानित रकना। अप्रतिष्ठित अपमानजनक टिप्पणी करना, हंसी उड़ाना, निंदा करना आदि अनेक बाते शामिल है। घर परिवार में ही महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। अक्सर छोटी-छोटी बातों पर ही उन्हें मारपीट का शिकार होना पड़ता है। पुलिस थानों मे मानसिक तथा शारीरिक प्रताड़ना देने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। गरीब अशिक्षित वर्गों में प्रताड़ना के मामले अधिक होते हैं। यद्यपि हमारे भारतीय संविधान में महिला समानता के लिए प्रावधान किए गए हैं, किन्तु विडंबना यह है कि लोकतंत्रात्मक देश मे अधिकांश महिलाए घर के अंदर ही लोकतंत्र नहीं पाती।
महिलाओं के साथ हिंसा

घरेलू हिंसा के प्रमुख कारण

1. महिलाओं का असक्षित होना।
2. पति का शराबी होना।
3. पुरूष की आराम की लत होना।
4. महिला के चरित्र पर संदेह होना।
5. महिला का सरल स्वाभाव का होना
6. महिलाओं की पुरूषों पर आर्थिक निर्भरता का होना।
7. महिला को स्वावलंबी बनने से रोकना।
8. समाज मे दहेज प्रथा का होना।
घरेलू हिंसा की तस्वीर
उक्त बातों के आधार पर यह स्पष्ट हो जाता है की मारपीट करना, थप्पड़ मारना, ठोकर मारना, धकेलना, गन्दी तस्वीरे देखने के लिए विवश करना, अपमानित करना, गालियाँ देना, पुत्री होने पर महिला को अपमानित करना, नौकरी छोड़ने के लिए विवश करना तथा आत्महत्या करने की धमकी देना, साधारण घरेलू उपयोग के कपड़ो, वस्तुओं अथवा चीजों के इस्तेमाल की अनुमति न देना ही घरेलू हिंसा है।

7/13/2019

7/13/2019

जाति व्यवस्था का अर्थ, परिभाषा और विशेषताएं

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का www.khaskhabr.com में, आज के इस लेख मे हम बात करेंगे भारतीय ग्रामीण जाति व्यवस्था के बारे में। ग्रामीण समाज की सामाजिक संरचना का मुख्य आधार जाति रही है। परम्परागत ग्रामीण समाज की संरचना में जाति प्रस्थिति निर्धारण का आधार रही है। किसी भी व्यक्ति की जाति उसके जन्म से निर्धारित होती है।
जाति व्यवस्था की संक्षिप्त जानकारी के बाद अब हम जाति व्यवस्था का अर्थ, जाति व्यवस्था की परिभाषाएं और जाति व्यवस्था की विशेषताएं विस्तार से जानेंगे।
जाति व्यवस्था का अर्थ

जाति व्यवस्था का अर्थ

अंग्रेजी में जाति के लिए Caste शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। Caste शब्द पुर्तगाली भाषा के Casta से बना है। जिसका अभिप्राय प्रजाति, नस्ल से अर्थात् जन्मगत आधार से है।
जाति व्यवस्था के अर्थ को सही तरीके से समझने के लिए जाति व्यवस्था की परिभाषाओं को जानना भी बहुत ही जरूरी हैं--

जाति व्यवस्था की परिभाषा

जाति परिभाषा न. 1. मजूमदार के अनुसार, "जाति एक बंद वर्ग है।"
जाति की परिभाषा न. 2. कूले के अनुसार, "जब एक वर्ग पूर्णतया वंशानुक्रम पर आधारित होता है, तब उसे हम जाति कह सकते है।"  इस परिभाषा मे जाति को वंशानुक्रम की विशेषता माना गया है।
जाति की परिभाषा न. 3. मर्टिण्डेल और मोनैक्सी के अनुसार, " जाति व्यक्तियों का एक ऐसा समूह है, जिनके कर्तव्यों तथा विशेषधिकारों का जादू अथवा धर्म दोनों से समर्पित तथा स्वीकृत भाग जन्म से निश्चित होता है।
जाति की परिभाषा न. 4. केतकर के अनुसार, " जाति एक ऐसा सामाजिक समूह है, जिसकी सदस्यता केवल उन व्यक्तियों तक सीमित है जो सदस्यों से जन्म लेते हैं और इस प्रकार से पैदा हुए व्यक्ति ही इसमें सम्मिलित होते हैं। ये सदस्य एक कठोर सामाजिक नियम द्वारा समूह के बाहर विवाह करने से रोक दिये जाते हैं।
उक्त परिभाषाओं के आधार पर जाति व्यवस्था की कुछ विशेषताएं स्पष्ट होती है। तो चलिए जानते है----
जाति व्यवस्था की विशेषताएं

जाति व्यवस्था की विशेषताएं 

1. जाति जन्म पर आधारित होती है
जाति व्यवस्था की सबसे प्रमुख विशेषता यह है की जाति जन्म से आधारित होती है। जो व्यक्ति जिस जाति मे जन्म लेता है वह उसी जाति का सदस्य बन जाता है।
2. जाति का अपना परम्परागत व्यवसाय
प्रत्येक जाति का एक परम्परागत व्यवस्था होता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण जजमानी व्यवस्था रही है। जजमानी व्यवस्था मे जातिगत पेशे के आधार पर परस्पर निर्भरता की स्थिति सामाजिक संगठन का आधार थी। लेकिन आज आधुनिकता के चलते नागरीकरण, औधोगीकरण आदि के चलते अब जाति का अपना परम्परागत व्यवसाय बहुत कम रह गया है।
3. जाति स्थायी होती है
जाति व्यवस्था के अन्तर्गत प्रत्येक व्यक्ति की जाति हमेशा के लिए स्थायी होती है उसे कोई छुड़ा नही सकघता या बदल नही सकता। कोई भी व्यक्ति अगर आर्थिक रूप से, राजनैतिक रूप से या किसी अन्य साधन से कितनी भी उन्नति कर ले लेकिन उसकी जाति में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नही हो सकता।
4. ऊंच- नीच की भावना
हांलाकि अब वर्तमान भारतीय ग्रामीण समाज में जाति के परम्परागत संस्तरण के आधारों मे परिवर्तन आया है। लेकिन फिर भी जाति ने समाज को विभिन्न उच्च एवं निम्न स्तरों में विभाजित किया गया है प्रत्येक जाति का व्यक्ति अपनी जाति की सामाजिक स्थिति के प्रति जागरूक रहता है।
5. मानसिक सुरक्षा प्रदान करना
जाति व्यवस्था में हांलाकि दोष बहुत है लेकिन जाति व्यवस्था की अच्छी बात यह है कि यह अपने सदस्यों को मानसिक सुरक्षा प्रदान करती है। जिसमें सभी सदस्यों को पता होता है कि उनकी स्थिति क्या है? उन्हें क्या करना चाहिए।
6. विवाह सम्बन्धी प्रतिबन्ध
जाति व्यवस्था के अर्न्तगत जाति के सदस्य अपनी ही जाति मे विवाह करते है। अपनी जाति से बाहर विवाह करना अच्छा नही माना जाता है। उदाहरण के लिए ब्राह्माण के लड़के का विवाह ब्राह्राण की लड़की से ही होगा। किसी अन्य जाति से नही।
7. समाज का खण्डात्मक विभाजन
जाति व्यवस्था ने संपूर्ण समाज का खण्ड-खण्ड मे विभाजन कर रखा है। समाज का विभाजन होना देश की एकता के लिए सही नही है।
तो दोस्तो इस लेख से सम्बन्धित या जाति व्यवस्था से सम्बन्धित आपका कोई विचार या सवाल है तो नीचे comment कर जरूर बताए।

7/08/2019

7/08/2019

जजमानी व्यवस्था का अर्थ, परिभाषा और विशेषताएं

जजमानी व्यवस्था 

जजमानी प्रथा के अन्तर्गत प्रत्येक जाति का एक निश्चित परम्परागत व्यवसाय होता है। इस व्यवस्था के अंर्तगत सभी जातियाँ  परस्पर एक-दूसरे की सेवा करती है ब्राहमण विवाह, उत्सव, त्यौहारो के समय दूसरी जातियों के यहां पूजा-पाठ करते है। नाई बाल काटने का काम करता है, धोबी कपड़े धोने का काम करता है, चमार जूते बनाने, जुलाहा कपड़े बनाने का काम करता है इसी प्रकार सभी जातियों एक-दूसरे के लिए सेवाएं प्रदान करती है। इसके बदले में भुगतान के रूप मे कुछ वस्तुऐ या रूपये दिये जाते है। इसी व्यवस्था को हम जजमानी प्रथा या जजमानी व्यवस्था के नाम से जानते है।
जजमानी प्रथा (व्यवस्था) का संक्षिप्त विवरण के बाद अब हम जजमानी (प्रथा) व्यवस्था का अर्थ, जजमानी व्यवस्था की परिभाषा और जजमानी व्यवस्था की विशेषताएं जानेंगे।
जजमानी व्यवस्था का अर्थ

जजमानी व्यवस्था का अर्थ 

जजमानी व्यवस्था परम्परागत व्यवस्था पर निर्भर है। इस व्यवस्था में प्रत्येक जाति का एक निश्चित व्यवसाय तय हो जाता है जो परम्परागत होता है तथा यह पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तान्तरित होता रहता है।

जजमानी व्यवस्था की परिभाषा 

आस्कर लेविस के अनुसार; इस प्रथा के अन्तर्गत एक गाँव में रहने वाले प्रत्येक जाति-समूह से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अन्य जातियों के परिवारों को कुछ प्रमाणित सेवायें प्रदान करें।
जजमानी व्यवस्था का अर्थ और परिभाषा को जानें के बाद अब हम जजमानी व्यवस्था की विशेषताएं जानेंगे----
जजमानी व्यवस्था की विशेषताएं

जजमानी व्यवस्था की विशेषताएं

1. सामुदायिक संगठन में सहायक 
जजमानी व्यवस्था के अन्तर्गत विभिन्न ऊँची-नीची जातियाँ को पारस्परिक रूप से एक-दूसरे की सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। इस पारस्परिक आश्रितता तथा निर्भरता के कारण ग्रामीण समाज का संगठन सुदृढ़ बना रहता है। इस प्रकार ग्रामीण समुदाय के लोगों में सामूहिक इच्छा और संगठन की भावना विकसित होती है।
2. मानसिक सुरक्षा 
जजमानी प्रथा के कारण परिजन के जीवन निर्वाह का साधन पूर्व निश्चित होता है। व्यक्ति को यह सोचना नही पड़ता है कि उसको क्या व्यवसाय करना है।
3. शान्ति व सन्तोष की भावना 
यह व्यवस्था ग्रामीण समुदाय के सदस्यों को सन्तोष व शांति प्रदान करती है। परजनों के व्यवसाय पैतृक तथा परम्परागत होने के कारण उन्हें नये धंधे को ढूंढना नहीं पड़ता है।
4. स्थायी सम्बन्ध
इस व्यवस्था का प्रथम लक्षण यह है कि इसमें जजमान और परजन के मध्य स्थायी सम्बन्ध पाये जाते हैं।
5. पैतृक सम्बन्ध 
जजमान और परजन के मध्य पाये जाने वाले सम्बन्धों का स्वरूप पैतृक होता है। जजमानी अधिकार सम्पत्ति के अधिकारों के समान ही होता है।
6. घनिष्ठ सम्बन्ध 
जजमानी व्यवस्था मे परजन और जजमान के सम्बन्धों मे घनिष्ठा होती है। वे एक-दूसरे के कार्यों को लगन से करते है।

7/06/2019

7/06/2019

ग्रामीण समाज का अर्थ, परिभाषा और विशेषताएं

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का www.khaskhabr.com मे, आज एक इस लेख मे बात करेंगे ग्रामीण समाज के बारें मे।

ग्रामीण सामाजिक संरचना का अर्थ

ग्रामीण सामाजिक संरचना एक सुन्दर चित्र प्रस्तुत करती है जिसमें विवाह, परिवार, वंश, गोत्र, नातेदारी, जाति, धर्म, राजनैतिक और आर्थिक समूह, तथा वर्ग शामिल है। जब हम ग्रामीण सामाजिक संरचना की बात करते है तो हमारे मस्तिष्क मे समुदाय का निर्माण करने वाले विभिन्न समूह जैसे, नातेदारी समूह, वंश, गोत्र, बिरादरी, जाति उपजाति तथा वर्ग भी होते है।
ग्रामीण समाज
ग्रामीण समाज
सामाजिक संरचना हम समाज के व्यवस्थित स्वरूप को कहते है। जिस प्रकार एक माकन ईट, सीमेंट और चूने का केवल ढेर नही होता बल्कि ईट, सीमेंट और चूने का व्यवस्थित स्वरूप होता है। उसी प्रकार सामाजिक संरचना सामाजिक प्रतिमानों, समितियों, संस्थाओं, सामाजिक मूल्यों आदि के व्यवस्थित स्वरूप को सामाजिक संरचना कहा जाता है।
ग्रामीण सामाजिक संरचना का अर्थ जाननें के बाद अब हम ग्रामीण समाज का अर्थ जानेंगे, इसके बाद ग्रामीण समाज की परिभाषा और ग्रामीण समाज की विशेषताएं जानेंगे।

ग्रामीण समाज का अर्थ 

जिस समुदाय की अधिकांशतः  अवयश्कताओं की पूर्ति कृषि या पशुपालन से हो जाती है उसे ग्रामीण समाज या समुदाय के नाम से जाना जाता है।
नगर की अपेक्षा गाँव में जनसंख्या का धनत्व बहुत ही कम होता है। गाँव में घनी जनसंख्या न होने के कारण कृषक का सीधा सम्बन्ध प्रकृति से होता है। ग्रामीण समाज में महानगरीय सभ्यता और बनावटी भौतिक संस्कृति का जाल नहीं बिछा होता। ग्रामीण समाज सरल साधा जीवन व्यत्ती करता है।

ग्रामीण समाज (समुदाय) की परिभाषा   

स्मिथ के मुताबिक;  कृषक और ग्रामीण समाज प्रायः पर्यायवाची शब्द है।
हेरेल्ड एफ. ई पीके के अनुसार; "ग्रामीण समुदाय परस्पर सम्बन्धित व्यक्तियों का वह समूह है जो एक कुटुम्ब से अधिक विस्तृत है और जो कभी नियमित, कभी अनियमित रूप से निकटवर्ती गृहों में या कभी निकटवर्ती गली मे रहते है। ये व्यक्ति कृषि योग्य भूमि में सामान्य रूप से खेती करते है और समतल भूमि को आपस में बाँट कर बंजर भूमि को चराने में प्रयोग करते है।
बूनर के अनुसार; " एक ग्रामीण समुदाय व्यक्तियों का एक सामाजिक समूह है, जो एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र मे निवास करते है तथा जीवन के सामान्य ढंग को अपनाते है।
सेंडरसन के अनुसार; "एक ग्रामीण समुदाय में स्थानीय क्षेत्रो के लोगों की सामाजिक अन्तक्रिया तथा उसकी संस्थायें सम्मिलित है जिनमें वह सामान्य क्रियाओं के क्रेन्द्र खेतों के चारों और बिखरी झोपड़ियों या ग्रामों में रहता है।
ग्रामीण समाज की विशेषताएं

ग्रामीण समाज (ग्रामीण समुदाय) की विशेषताएं 

1. जाति व्यवस्था 
ग्रामीण समाज की मुख्य विशेषताओं मे से एक जाति व्यवस्था है। जाति के आधार पर ग्रामीण समाज मे संस्तरण पाया जाता है। जाति एक सामाजिक संस्था और समिति दोनों ही है। जाति की सदस्यता योग्यता के आधार पर नही बल्कि जन्म के आधार पर निर्धारित होती है। प्रत्येक जाति का एक परम्परागत व्यवसाय होता है। जाति के सदस्य अपनी ही जाति मे विवाह करते हैं।
2. कृषि मुख्य व्यवसाय 
ग्रामीण समाज की सबसे मुख्य विशेषता कृषि है ग्रामीण समाज की अर्थव्यवस्था कृषि पर ही टिकी है। हांलाकि गांव मे अन्य व्यवसाय भी होते है लेकिन 70 से 75 प्रतिशत लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर ही आशर्ति होते है।
3. संयुक्त परिवार का होना 
ग्रामीण समाज में संयुक्त परिवारों की प्रधानता पाई जाती है, यहां एकल परिवारों का आभाव होता है। ग्रामीण समाज मे ऐसी परिवार पाई जाते है जिनमें तीन या अधिक पीढ़ियों के सदस्य एक स्थान पर रहते है। इनका भोजन, सम्पत्ति और पूजा-पाठ साथ-साथ होता है। ऐसे परिवारों का संचालन परिवार के सबसे बड़े व्यक्ति द्वारा होता है।
4. जनसंख्या का कम घनत्व 
ग्रामों में नगर की तुलना मे जनसंख्या का घनत्व बहुत ही कम होता है।
5. प्रकृति के समीप
ग्रामीण समाज का कृषि मुख्य व्यवसाय होने के कारण ग्रामीण समाज प्रकृति के समीप होता है।
6. भाग्यवादीता
भारतीय गाँवों के निवासियों मे शिक्षा का अभाव होता है। अतः वे अन्ध-विश्वासी और भाग्यवादी होता है।
7. सरल व सादा जीवन
भारत के ग्रामवासी सादा जीवन व्यतीत करते है। उनके जीवन मे कृत्रिमता और आडम्बर नही है। उनमें ठगी, चतुरता और धोखेबाजी के स्थान पर सच्चाई, ईमानदारी और अपनत्व की भावना अधिक होती है।
8. सामाजिक समरूपता 
जहां नगरों की विशेषता सामाजिक विषमता है वही ग्रामीण समाज की विशेषता सामाजिक समरूपता का होना है। ग्रामीणों के जीवन स्तर में नगरों की भांति जमीन-आसमान का अन्तर नही पाया जाता।  सभी लोग एक जैसी भाषा, त्यौहार-उत्सव प्रथाओं और जीवन-विधि का प्रयोग करते है। उनके सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनैतिक जीवन में अनेक अंतर नही पाये जाते है।
9. जनमत का अधिक महत्व
ग्रामवासी जनमत का सम्मान करते और उससे डरते है। वे जनमत की शक्ति को चुनौती नही देते वरन् उसके सम्मुख झुक जाते है। पंच लोग जो कुछ कह देते है उसे वे शिरोधार्य मानते है। पंच के मुंह से निकला वाक्य ईश्वर के मुंह से निकला वाक्य होता है। जनमत की अवहेलना करने वाले की निन्दा की जाती है।
10. आत्म निर्भरता 
ग्रामीण समाज मे हर क्षेत्र में आत्म निर्भरता पाई जाती है। चाहें वह आर्थिक हो, सामाजिक हो, सांस्कृतिक हो या राजनैतिक हो। गांव मे जनमानी प्रथा द्वारा जातियां परस्पर एक-दूसरे के आर्थिक हितों की पूर्ति करती है।
11. जजमानी प्रथा 
जजमानी व्यवस्था भारतीय ग्रामीण और जातिगत ढ़ाचें की एक प्रमुख विशेषता है। इसका स्वरूप परम्परागत है, इस व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक जाति का एक निश्चित व्यवसाय होता है। इस प्रकार जाति प्रथा ग्रामीण समाज में श्रम-विभाजन का एक अच्छा उदाहरण पेश करती है। सभी जातियां परस्पर एक-दूसरे की सेवा करती है।
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