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8/17/2019

8/17/2019

औद्योगीकरण का अर्थ, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

औद्योगीकरण का अर्थ ||Meaning of industrialization in hindi||

संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिर्पोट के अनुसार "औद्योगीकरण से तात्पर्य बड़े-बड़े उद्योगों के विकास तथा छोटे और कुटीर उद्योगों-धंधों के स्थानों पर बड़े पैमाने की मशीनों की व्यवस्था से है।
औद्योगीकरण एक प्रकार की प्रक्रिया है। जिसके अन्तर्गत लोग पुरानी पध्दतियों को त्याग देते है और उसके स्थान पर आधुनिक अधिक सरल, अधिक उत्पादक तकनीकी साधनों का प्रयोग करते हैं।
औद्योगीकरण में आधुनिकतम औद्योगीकरण का प्रयोग किया जाता है और जिसका उदेश्य उत्पादन में तीव्र वृध्दि, मानव श्रम की जगह मशीनों का प्रयोग करना होता है।  " औद्योगीकरण का प्रत्यक्ष सम्बन्ध उत्पादकता से है और दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। जहां औद्योगीकरण के कारण उत्पादन की दर तथा मात्रा प्रभावित होती है वहीं पर अधिक उत्पादन स्वयं औद्योगीकरण प्रक्रिया को तीव्र करता है।
औद्योगीकरण का अर्थ जानने के बाद अब हम औद्योगीकरण के सामाजिक प्रभाव और आर्थिक प्रभाव जानेंगे।
औद्योगीकरण और नागरीकरण एक सिक्के के पहलू हैं अर्थात् औद्योगीकरण और नगरीकरण से उत्पन्न सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों में कोई भिन्नता नही है। औद्योगीकरण की प्रक्रिया से नगरों का विकास तेजी से होता है। जिस स्थान पर औद्योगीकरण होता है वहा लोग रोजगार के लिए आने लगते है और जनसंख्या में बढ़ोतरी होने गलती है।
औद्योगीकरण का अर्थ, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

औद्योगीकरण के सामाजिक प्रभाव ||Social Impact of Industrialization in Hindi||

1. अपरोधों में वृध्दि 
 औद्योगीकरण के प्रभाव स्वरूप अपरोधों मे वृध्दि होती है। क्योंकि ग्रामीण सामाज के लोग रोजगार के लिए  औद्योगीक क्षेत्र मे आने लगते है। यहां पर उन्हें जो वातावरण मिलता है उससे वह अनिविज्ञ होते है।  जिसकी वजह से वह तनाव और चिंता से घिर जाते है। यहां पर उन्हें अनौपचारिक सम्बन्धों का अभाव मिलता है। इसलिए वह व्यसनों शराब जैसी आदि लतों से घिर जाते है।
2. आधुनिकीकरण में वृध्दि 
औद्योगीकरण से आधुनिकीकरण में वृध्दि होती है। क्योकि औद्योगीकरण में उत्पादन मे नई तकनीक का प्रयोग, नया बजार, यातायाता के साधन आदि आधुनिकीकरण की पृष्ठभूमि तैयार करते है।
3. स्त्रियों की स्थित में परिवर्तन 
नागरीकरण की तरह ही औद्योगीकरण से भी स्त्रियों की स्थित में परिवर्तन होता है। औद्योगीकरण में स्त्रियों को शिक्षा और रोजगार के समान अवसर प्रदान किए हैं। जिससें स्त्रियां सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर हो रही है।
4. जाति व्यवस्था में शिथिलता
औद्योगीकरण के कारण विभिन्न व्यवसायों में एक साथ काम करने के कारण जातिगत दूरियां कम हुई है। उद्योगों में सभी जातियों के व्यक्ति एक साथ मिलकर कार्य करते हैं। यहां पर उनमें जातिगत भावना का अभाव पाया जाता है। विविध व्यवसायों के विकास के साथ होटल, यातायात के साधनों का विकास, शिक्षा दर में वृध्दि आदि ऐसे कारण से जिनसें जाति प्रथा में शिथिलता आ रही है।
5. संयुक्त परिवारों का विघटन 
औद्योगीकरण के प्रभाव से संयुक्त परिवार का विघटन हो रहा है। लोग रोजगार की तलाश में औद्योगीक क्षेत्रों मे आ रहें हैं जिससे नगरो का विकास हो रहा है। फलस्वरूप संयुक्त परिवार एकल परिवारों मे परिवर्तित हो रहे है।

औद्योगीकरण के आर्थिक प्रभाव ||The economic impact of industrialization in Hindi||

1. औद्योगीकरण के फलस्वरूप पूँजीवाद में वृध्दि हो रही है। क्योंकि बड़े-बड़े कारखानों को पूंजीपति ही चला सकते है।
2. औद्योगीकरण के श्रम विभाजन और विशेषीकरण का महत्व समाज में बढ़ रहा है।
3.  औद्योगीकरण ने बेरोजगारी की समस्या को भी जन्म दिया है।
4. बड़े-बड़े कारखानों में श्रमिकों के कार्य करने की दशाएं अभी भी असंतोषजनक हैं। जिससे विभिन्न प्रकार के रोग और शारीरिक दुर्घटनाएं होती रहती है।
5. औद्योगीकरण से लोगों के जीवन स्तर में बदलाव आया है।
6. औद्योगीकरण से कुटीर उद्योगों का पतन हो रहा है।
दोस्तों इस लेख में हमने औद्योगीकरण का अर्थ, औद्योगीकरण के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों के बारें में जाना अगर इस लेख के सम्बन्ध में आपका कोई विचार है तो नीचे comment कर जरूर बताएं। मैं आपके comment  का इंतजार कर रहा हूं।

8/15/2019

8/15/2019

आधुनिकीकरण का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं और प्रभाव

आधुनिकीकरण (आधुनिकता modernisation)  

आधुनिकता का अभिप्राय जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में समकालीन को परम्परागत से अगल समझना है। समाज के अन्तिम से अन्तिम मूल्यों के अनुसार रहने वाली वस्तु को आधुनिक कहते हैं। उस वस्तु के इस प्रकार के रहने के गुण अथवा स्थिति को हम आधुनिकता कहते है। आधुनिकीकरण की प्रक्रिया वैज्ञानिक ज्ञान के विस्तार का सूचक है।
आज के इस लेख मे हम आधुनिकता (आधुनिकीकरण) का अर्थ, आधुनिकीकरण (आधुनिकता) की परिभाषा, आधुनिकीकरण की विशेषताएं और आधुनिकीकरण (आधुनिकता) के प्रभाव के बारें में चर्चा करेंगे।
आधुनिकीकरण, आधुनिकता

आधुनिकीकरण (आधुनिकता) का अर्थ

आधुनिक शब्द अंग्रेजी के शब्द (modern) का हिन्दी रूपान्तरण है जिसका अभिप्राय है प्रचन या फैशन। आधुनिकीकर ण सामाजिक परिवर्तन की एक प्रक्रिया है जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण व तर्क पर आधारित है। सैध्दांतिक तौर पर इसकी शुरूआत यूरोपीय ज्ञानोदय से हुई। आधुनिकता से तात्पर्य जो भी समकालीन है अर्थात् वर्तमान समय में चलन में है वही आधुनिक है चाहे वह अच्छा हो या बुरा।
आधुनिकता या आधुनिकीकरण के अर्थ को अच्छी तरह से समझने के लिए अब हम भिन्न विद्वानों द्वारा दी गई आधुनिकता की परिभाषा को जानेंगे। 

आधुनिकीकरण (आधुनिकता) की परिभाषा 

अलातास के अनुसार "आधुनिकीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान का समाज में प्रचार एवं प्रसार होत् है। जिससे समाज में व्यक्तियों के स्तर में सुधार होता है और समाज तरक्की की और आगे बढ़ता है।"
डेनियल लर्नर के अनुसार "आधुनिकता प्रगति, उन्नति की और सम्पन्नता तथा अनुकूलन की तात्पर्यता से सम्बन्धित मन की आकांक्षाओं की एक अवस्था है।
श्यामाचरण दुबे के अनुसार "आधुनिकीकरण एक प्रकिया है जो परंपरागत या अर्ध्दपरंपरागत अवस्था से प्रौद्योगिकी के किन्ही इच्छित प्रारूपों तथा उनसे जुड़ी हुई सामाजिक संरचना के स्वरूपों, मूल्यों प्रेरणाओं और सामाजिक आदर्श नियमों की ओर से होने वाले परिवर्तन को स्पष्ट करती है।"

    आधुनिकीकरण (आधुनिकता) की विशेषताएं 

1. आधुनिकीकरण परिवर्तन की सार्वभौमिक प्रक्रिया है आधुनिकीकरण की प्रक्रिया सभी जगहो पर होती है।
2. आधुनिकीकरण (आधुनिकता) विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास की आत्मा है।  आधुनिकता से भिन्न प्रकार के ज्ञान और अनुभव में वृध्दि होती है।
3. आधुनिकीकरण में नगरीकरण  में वृध्दि, समानता, स्वतंत्रता तथा प्रजातांत्रिक मूल्यों को विकास होता है।
4. आधुनिकता आर्थिक तथा राजनीतिक सहभागिता में वृध्दि करती है।
5. आधुनिकता की प्रक्रिया में प्रचानी प्रथाओं रूढ़ियों तथा मूल्यों का विरोध होता है अतः आधुनिकीकरण में व्यावहारिक विज्ञान का विकास होता है।
6. आधुनिकीकरण में नये विचारों को स्वीकार किया जाता है।
7. आधुनिकता में प्रचानी प्रथाओं रूढ़ियों आदि की अपेक्षा वर्तमान व भविष्य में अधिक रूचि ली जाती है।
8. आधुनिकता (आधुनिकीकरण) में संस्कृति व धर्मनिरपेक्षता जैसे तत्वों का समावेश होता है।
9. आधुनिकीकरण सामाजिक संरचना में परिवर्तन लती है।
10. आधुनिकीकरण में शिक्षा का प्रसार होता है।

आधुनिकीकरण (आधुनिकता) के प्रभाव 

आधुनिकता का समाज और भारतीय जीवन पर प्रभाव इस प्रकार है---

 1. वैवाहिक संस्थाओं में परिवर्तन 
आधुनिकता के प्रभाव से अब पुरानी विवाह सम्बन्धित परंम्पराए समाप्त होने लगी है। पहले विवाह विच्छेद बहुत ही कम होते थे लेकिन आज आधुनिकता और पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव से विवाह विच्छेद अधिक होने लगे है। आधुनिकता एक अच्छा प्रभाव यह भी है की अब विधवापूर्नन विवाह को भी प्रोत्साहन मिलने लगा है। सती प्रथा समाप्त हो चुकी है।
2. आर्थिक प्रगति 
आधुनिकीकरण के परिणामस्वरूप आर्थिक क्षेत्र मे तेजी से प्रगति हो रही है। आधुनिक मशीने, उत्पादन में वृध्दि, नई तकनीको का प्रयोग आदि आधुनिकता का प्रभाव है।
3. स्त्रियों की स्थिति में परिवर्तन 
आधुनिकता के फलस्वरूप अब भारतीय समाज में स्त्रियां घर की चार दिवारी में बंद नही रही है अब उन्होंन पर्दा-प्रथा को तोड़ दिया है। अब भारतीय नारी शिक्षित और स्वतंत्र हो रही है अब वह आफिसों, बैंकों, औद्योगों आदि में पुरूषों के समान कार्य कर रही है।
4. बेरोजगारी में वृध्दि 
आधुनिकीकरण के फलस्वरूप मशीनीकरण भी तेजी से बढ़ रहा है। मशीनीकरण के कारण श्रमिकों को रोजगार नही मिल पा रहा है क्योंकि मशीनों के कारण श्रमिकों की कम आवश्यकता होती है।
5. औपचारिकता में वृध्दि 
आधुनिकीकरण से फलस्वरूप औपचारिक सम्बन्धों में वृध्दि हो रही है। औपचारिक सम्बन्धों के कारण घनिष्ठ संबंधों का अभाव बढ़ता जा रहा है। अब सामाजिक संबंधों में कृत्रिमता अधिक पायी जाती है।
6. पश्चिमीकरण
आधुनिकीकरण के कारण भारत में पश्चिमीकरण तेजी से हो रहा है। भारत में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, शिक्षा, आदि सभी क्षेत्रो में पश्चिमीकरण के प्रभाव देखा जा सकता है।
7. नगरीकरण
 भारत में नगरीकरण तेजी से हो रहा है। नगरीकरण की इस प्रक्रिया से ग्रामीण जीवन भी प्रभावित हुआ है। ग्रामवासी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु नगरों में जाने लगे है। नगरीकरण से भीड़-भाड़ अपराध, गंदी बस्तियों का भी जन्म हो रहा है। ये सभी प्रवृत्तियां आधुनिकता से सम्बन्धित है।
दोस्तों इस लेख में हमने आधुनिकीकरण (आधुनिकता) का अर्थ, परिभाषाएं, विशेषताओं और प्रभाव के बारें में विस्तार से जाना अगर इस लेख से सम्बन्धित आपका कोई विचार या सवाल है तो नीचे comment कर जरूर बताएं।

8/14/2019

8/14/2019

नगरीकरण का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं और प्रभाव

नगरीकरण (शहरीकरण)
नगर सामाजिक रूप से विषम जातीय व्यक्तियों का एक अपेक्षाकत वृहद् सघन एवं स्थाई होता है। समाजशास्त्री नगरीय और ग्रामीण जीवन की तुलना सामाजिक संबंधो में कार्य दशाओं मे परिवर्तन के आधार पर करते हैं। नगरीय सामाजिक संबंधो मे घनिष्ठ संबंधो का अभाव पाया जाता है।  भारत में बढ़ती जनसंख्या, औधोगीकरण एवं उन्नति से नगरों के निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नगर बनने की यह प्रक्रिया अधिक पुरानी न होकर एक प्रकार से नवीनतम प्रक्रिया है।
आज के इस लेख मे हम नगरीकरण का अर्थ, नगरीकरण की परिभाषा, नगरीकरण की विशेषताएं और नगरीकरण के प्रभाव जानेंगे। 
नगरीकरण का अर्थ
नगरीकरण

नगरीकरण का अर्थ 

ग्राम से नगर बनने की प्रक्रिया को नगरीकरण (शहरीकरण) कहा जाता है। नगरीकरण का अर्थ इस प्रकार स्पष्ट होता है कि जनसंख्या के घनत्व में वृध्दि ही नगरीकरण की ध्घोतक नही है अपितु वहां के सामाजिक व आर्थिक सम्बन्धो में  परिवर्तन, अनौपचारिक सम्बन्धों का औपचारिक सम्बन्धों में परिवर्तन, प्रथमिक समूहों का द्वितीय समूहों में परिवर्तन भी नगरीकरण का ध्घोतक है। जो पहले से ही नगर है उन्हें नगरीकरण नही कहा जा सकता नगरीकरण का तात्पर्य उन स्थानों से है जहाँ नगर बनने की प्रक्रिएं चल रही हो।
नगरीकरण के अर्थ को और भी अच्छे से समझने के लिए हम नगरीकरण की विभिन्न विद्वानों द्वारा दी गई परिभाषों को जानेंगे। 
नगरीकरण की परिभाषा
नगरीकरण

नगरीकरण की परिभाषा  

श्री निवास के अनुसार "नगरीकरण से तात्पर्य केवल सीमित क्षेत्र में जनसंख्या वृध्दि से नहीं है वरन् सामाजिक आर्थिक संबंधो में परिवर्तन से है।
किंग्सले डेविस के अनुसार " नगरीकरण एक निश्चित प्रक्रिया है, परिवेश का वह चक्र है जिससे कोई समाज खेतिहर से औघोगिक समाज में परिवर्तित हो जाता है।"
मारविन ओलसन के अनुसार " नगरीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत एक समाज के समुदाय के आकार और शक्ति में वृध्दि होती रहती है।
नगरीकरण की विशेषताएं

नगरीकरण की विशेषताएं

नगरीकरण की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार है---

1. उद्योगों का केन्द्रयकरण बड़े नगरों मे दृष्टिगोचर होता है।
2. नगरीकरण नगर बनने की प्रक्रिया है।
3. नगरीकरण की प्रक्रिया मे नये नगर बनते हैं एवं महानगरों की उत्पत्ति होती है।
4. कम स्थान में अधिक व्यक्ति निवास करते है।
5. नगरीकरण की प्रक्रिया के दौरान नगरों मे निवासरत व्यक्ति नगरीय जीवन शैली को आत्मसात कर लेते हैं।
6. शिक्षितों की संख्या का अनुपात ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक होता है।
7. अनौपचारिक संबन्ध औपचारिक सम्बन्धों मे परार्वतति होने लगते है।
9. भिन्न-भिन्न संस्कृतियों, भाषाओं एवं धर्म के लोग एक साथ रहने लगते है।
10. औद्योगिकरण की प्रक्रिया होने लगती है।

भारत मे नगरीकरण के प्रभाव 

1. ग्रामीण जीवन पर प्रभाव 
नगरीकरण ने ग्रामीण जीवन को प्रभावित किया है। ग्रामीण लोग शहर की और उद्योगोन्मुखी व्यवसायों, शिक्षा आदि सुविधाओं के लिए नगर की ओर आकृष्ट हो रहे है।
2. जीवन में कृत्रिमता 
नगरीकरण के कारण आज जीवन में वास्तविकता नही रही है। नगरीकरण से पूर्व मानव 'सादा जीवन उच्च विचारों में विश्वास रखता था लेकिन उसका झुकाव कृत्रिमता की ओर होता जा रहा है। मानव जीवन मे अब कृत्रिमता आ गई है अब वह दिखावे एवं शान-शौकत में अधिक विश्वास रखने लगा है।
3. सामाजिक मूल्यों में परिवर्तन 
नगरीकरण के फलस्वरूप अब सामाजिक मूल्यों मे परिवर्तन होने लगा है। यह नगरीकरण का एक सामाजिक प्रभाव हैं। व्यक्तिवादी जीवन मूल्यों में सामूहिकता की भावना मे निरंतर कमी होती जा रही है। जीवन में नैतिकता और विश्वास का अभाव होने लगा है और स्वार्थ की भावना बढ़ती जा रही है।
4. धार्मिक जीवन पर प्रभाव
नगरीकरण का धार्मिक जीवन पर भी व्यापक प्रभाव पड़ रहा है।   धार्मिक विश्वास, परंपरा, कर्मकाण्ड आदि के तौर तरीक बदल ने लगे है। अब अंधविश्वासों को बढ़वा देने वाले तत्व समाप्त होने लगे है। शिक्षा की सहायता से अब वैज्ञानिक और तर्क प्रधान सोच विकसित होने लगी है।
5. मनोरंजन का व्यापारीकरण 
ग्रामीण समाज मे मनोरंजन का उद्देश्य धन कामना कभी नही रहा है ग्रामीण समाज मे मनोरंजन तनावमुक्ति एवं साथ-मिलजुकर बैठने के लिए किया जाता है। लेकिन नगरीकरण मे मनोरंजन का उद्देश्य धन कामना रहा है।
6. महिलाओं कि स्थति में परिवर्तन 
नगरीकरण के प्रभाव से महिलाओं की स्थिति मे परिवर्तन आने लगे है। अब वह घर के अंदर अपनी लैंगिक भूमिकाओं तक सीमित नही है। बल्कि आर्थिक रूप से भी वह आत्मनिर्भर रहने लगी है। अब शिक्षा एवं राजनीति जैसे क्षेत्रों मे महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। 
7. हम की भावना का अभाव 
नगरीकरण के कारण अब हम की भावना मे कम आने लगी है। नगरीकयण ने व्यक्तिवादीता को जन्म दिया है। प्रत्येक व्यक्ति यहां केवल अपने ही हित के बारें मे सोचता है। 
8. सामाजिक संस्थाओं में परिवर्तन 
नगारीकरण के प्रभाव से परिवार और विवाह में निरंतर परिवर्तन बढ़ता जा रहा है। अब संयुक्त परिवार प्रणाली एकल परिवार प्रणाली मे बदलने लगी है। नगरीकरण के प्रभाव से व्यक्तिवादी सोच पनने लगी है।
दोस्तो इस लेख मे हमने नगरीकरण का अर्थ,परिभाषा, विशेषताएं और नगरीकरण के भारतीय समाज पर पड़ने वाले प्रभावों के बारें मे जाना। इस लेख से सम्बन्धित आपका कोई सवाल या प्रश्न है तो नीचे comment कर जरूर बताए।

8/04/2019

8/04/2019

मद्यपान का अर्थ, परिभाषा, कारण और दुष्परिणाम

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का https://www.khaskhabr.com मे, हमारी भारतीय संस्कृति में मद्यपान को कभी भी उचित नही माना गया है। प्रचानी भारत में भी मद्यपान का प्रचलन था लेकिन अंग्रेजों के आगमन के पश्चात शराब (मद्यपान) का प्रचलन समाज में और अधिक बढ़ता चला गया। अंग्रेजों ने शराब को अपने आर्थिक लाभ का माध्यम बनाया। आज के इस लेख में हम मद्यपान का अर्थ, परिभाषा, मद्यपान (शराब पीने के) कारण और मद्यपान के दुष्परिणाम पर निबंध भी लिखेंगे। 
मद्यपान के अन्तर्गत निम्नलिखित बातें शामिल की जा सकती है----
1. शराब का सेवन करना ही मद्यपान है। 
2. मद्यपान एक सामाजिक समस्या है।
3. मद्यपान एक बुरी आदत है जिसे व्यक्ति चाहते हुये भी नही छोड़ पाता।
4. मद्यपान से कृत्रिम उत्तेजना अथवा कृत्रिम अचेतन अथवा न्यून चेतना की स्थिति उत्पन्न होती है।
5.मद्यपान एक सामाजिक कलंक है।
मद्यपान का अर्थ

मद्यपान का अर्थ 

मद्यपान के अर्थ को बताते हुए फेयरचाइल्ड ने लिखा है कि" शराब की असामान्य बुरी आदत ही मद्यपान है। महात्मा गांधी ने मद्यपान के विषय पर कहा था "शराब की लत शारीरिक, मानसिक, नैतिक और आर्थिक रूप से मनुष्य को बर्बाद कर देती है एवं शराब के नशे में मनुष्य दुराचारी बन जाता है।   
शराब (मद्यपान) एक ऐसी बुरी आदत है जिसकी वजह से शराब पीने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और इस आदत से उस व्यक्ति का पूरा जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। अत्यधिक मद्यपान से स्मरण-शक्ति समाप्त हो जाती है और अपनी इच्छाओं का दमन करने की योग्यता समाप्त हो जाती है। शराब पीने वाला व्यक्ति दूसरों के हाथों का खिलौना बन जाता है।

 मद्यपान की परिभाषा 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार "मद्यपान का तात्पर्य मद्यता मद्य मतलब नशा करने वाले उस व्यक्ति से है जो शराब पर इतना निर्भर हो जाता है कि जिससे व्यक्ति का मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य, सामाजिक संबंध और आर्थिक जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। मद्यपान (शराब) का अर्थ और परिभाषा के बाद अब हम शराब (मद्यपान) के कारणों के बारें में जानेंगे। 
मद्यपान के कारण

मद्यपान (शराब पीने) के कारण  

1.मानसिक चिन्ता
समाज में कुछ व्यक्ति ऐसे होते है जिन्हें अपने परिवार, पत्नी, बच्चों  आदि की बहुत ही अधिक चिन्ता हो जाती है। इस कारण वे लोग अपनी मानसिक चिन्ताओं को दूर करने के लिए (मद्यपान) शराब का सेवन करने लगते है।
2. फैशन
पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव के कारण समाजिक जीवन में तेजी से बदल हो रहै है। भारतीय समाज में शराब पीना अब फैशन बन गया है। कुछ लोग शराब पीने को अपनी ऊंची सामाजिक स्थिति का प्रतीक मानने लगे है।
3. वातावरण एवं माहौल 
मदिरापान या मद्यपान की लत का एक मुख्य कारण व्यक्ति के चारों के माहौल या वातावरण का रहा है। यदि किसी व्यक्ति के दोस्त, उसके परिवार के सदस्य आस-पड़ोस के लोग मद्यपान की लत के शिकार है तो उस व्यक्ति मे शराब के सेवन करने की लग का पड़ जाना कोई आश्चर्य की बात नही है।
4. संवेदनात्मक आनन्द 
यदि आप किसी शराबी से पुछ़े के तुम शराब क्यों पीते हो? तो उसका जबाव होगा आनन्द के लिए। मद्यपान से संवेदनात्मक आनन्द प्राप्त होता है।   
5. शराब का आसानी से उपलब्ध होना
वर्तमान समय में शराब पीने वाले व्यक्ति को बड़ी ही आसानी से शराब मिल जाती है। लगभग हर जगह 5 से 10 किलोमीटर की दूरी पर उसे शराब की दूकान मिल जाती है। यह भी शराब (मद्यपान) पीने का एक कारण है।
6. विघटित व्यक्तित्व वाले लोग 
अक्सर देखा गया है की असंतुलित व्यक्तित्व वाले लोग अपने साथियों और परिवार के साथ समायोजन नहीं कर पाते। ऐसे लोग सदैव भयभीत रहते है। ऐसे लोग मद्यपान (शराब) का सेवन करने लगते है। 
7. मित्र मंडली
यदि कोई व्यक्ति बुरी संगति के लोगों के प्रभाव में आ जाए या ऐसे साथियों के सम्पर्क में आ जाए जो शराब (मद्यपान) का सेवन करते है तो व्यक्ति मे शराब का सेवन करने की संभावनाएं बढ़ जाती है।
मद्यपान के दुष्प्रभाव

मद्यपान के दुष्परिणाम (शराब पीने के नुकसान)

मद्यपान (शराब) के सेवन से हाने वाली हानियों (दुष्प्रभाव) को निम्न आधारों पर स्पष्ट किया जा सकता है---
1. मानसिक हानि 
शराब या मद्यपान का सेवन करने पर व्यक्ति की विचार, चिन्तन और स्मरण शक्ति अवरुध्द हो जाती है। वह शराब पीकर अनाप-शनाप बकता है। मद्यपान के नशे में व्यक्ति इतने चूर हो जाता है कि वह अपना होश भी खो बैठता है। शराब के सेवन से व्यक्ति का दिमाग काम करना बंद कर देता है और वह अपने विवेक का इस्तेमाल नही कर पाता है। उसकी सोचने-समझने की शक्ति नष्ट हो जाती है।
2. शारीरिक स्वास्थ्य की समस्याएं     
शराब (मद्यपान) का सेवन करने वाले व्यक्ति को अनेक रोग घेर लेते हो। शराब का अधिक सेवन करने से व्यक्ति को निम्न रोग हो सकते है-- जैसे  पेट का कैंसर, तंत्रिका तंत्र का कमजोर होना, मानसिक अस्थिरता, यकृत खराब होना, लिवर खराब होना, ह्रदय रोग, हड्डियों का कमजोर होना, बेचैनी, सिरदर्द, हाथ पैरों की कंपन, साँस की गति तेज होना आदि भयानक नुकसान शराब का सेवन करने वाले व्यक्ति के शरीर में हो सकते है।
शराब पीने के नुकसान
3. पारिवारिक विघटन 
शराब का सेवन करने वाला व्यक्ति कभी भी अपनी पत्नी और बच्चों को सुख से नही रख पाता। शराब के सेवन से पति-पत्नी में झगड़े बढ़ जाते है। शराबी व्यक्ति अपने परिवार का एक अच्छा सदस्य भी नही बन पाता। शराबी व्यक्ति के अपने पड़ोसियों के साथ भी अच्छे सम्बन्ध नही होते। शराब पीने के कारण घरेलू हिंसा की घटनाओं में निरंतर वृध्दि हो रही है।
4. व्यक्तिगत विकास से अवरोध
मद्यपान (शराब) का सेवन करने वाला व्यक्ति कभी भी अपना विकास नही कर पाता। शराबी व्यक्ति दूसरों के हाथ का खिलौना बन जाता है। उसकी सोचने समझने की शक्ति समाप्त हो जाती है। ऐसे व्यक्ति चोरी करने, डकैती डालने, बलात्कार करने जैसे अपराध को करने से भी नही चूकते है।
5. आर्थिक क्षति 
शराब पीने वाले व्यक्ति की कार्यक्षमता में कमी आ जाती है। समाज में ऐसे व्यक्ति की प्रतिष्ठा भी बहुत ही कम होती है। ऐसे व्यक्ति अपने काम धंधे से विमुख हो जाते है। ऐसे व्यक्ति जो थोड़ा बहुत धन कमाते है वह उसे शराब पीने में ही नष्ट कर देते है और अपनी पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण ठीक प्रकार से नही कर पाते। 
इस प्रकार स्पष्ट होते है कि शराब (मद्यपान) का सेवन करना एक सामाजिक बुराई है जिससे समाज की रक्षा करना बहुत ही आवश्यक है। शराब ने ना जाने कितने ही परिवारों को बर्बाद किया है? न जाने शराब ने कितने सीधे-साधे लोगों को खराब इंसान बना दिया है? अगर आपने इस लेख को ध्यान से पढ़ा से तो आज से ही यह कसम खाईएं की मैं कभी भी किसी भी स्थिति में शराब का सेवन नही करूंगा। हमारे भारत के संविधान के अनुच्छेद 47 में इस बात का उल्लेख किया गया है की राज्य चिकित्सा संबंधी उपयोग को छोड़कर उन मादक पेयों और औषधियों के प्रचलन पर रोक लगाने का प्रयास करेंगे जो स्वास्थय के लिए हानिकारक है। श्री भारतन कुमारप्पा ने शराब के बुरे प्रभावों की व्याख्या करते हुए लिखा है कि "सम्पत्ति और खाद्य के साथ-साथ शराब के दुष्परिणामों में नैतिकता, हत्या, चोरी, पारिवारिक कलह, उजड़े घरों, भूखें बच्चों, बर्बाद गृह-स्वामियों और संक्षेप में इससे प्रस्तूत नैतिक एवं बौध्दिक ह्रास तथा निर्णय लेने की क्षमता में आने वाली की गणना हमें करनी चाहिए।
इस लेख में हमनें मद्यपान (शराब) का अर्थ, मद्यपान की परिभाषा, मद्यपान के कारण और मद्यपान के दुष्प्रभावों के पर में विस्तार से जाना है। अगर आपका मद्यपान के सम्बन्धित कोई सवाल या प्रश्न है तो नीचे comment कर जरूर बताए।

8/03/2019

8/03/2019

भारत में बेरोजगारी के कारण

बेरोजगारी 

भारत की प्रमुख समस्याओं मे से एक बेरोजगारी की समस्या हैं। बेरोजगारी एक प्रकार से निर्धनता है को की एक वैश्विक सामाजिक समस्या है। सभी देशों में बेरोजगारी के भिन्न-भिन्न कारण हो सकते है। विकसित और विकासशील देशों में बेरोजगारी के कारण भिन्न-भिन्न हो सकते है। भारत एक विकासशील देश है  अर्थात् भारत अभी विकास की और बढ़ रहा है। आज के इस लेख मे हम भारत मे बेरोजगारी के कारणों के बारें में जानेंगे।
बेरोजगारी श्रम की मांग और पूर्ति की असंतुलित अवस्था का परिणाम है। बेरोजगारी को दूर करने करने के लिए भारत सरकार ने समय-समय पर अनेक प्रयास किए है। भारत सरकार ने रिक्तियों की अनिर्वार्य अधिसूचना अधिनियम 1959 के तहत पूरे भारत में रोजगार कार्यालय खोले। इन कार्यलयों का उद्देश्य रोजगार की सूचना एवं रोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से खोले गए है। सन् 2011 की जनगणना के आँकड़ो के अनुसार भारत की युवा आबादी का 20% यानि 4.7 करोड़ पुरूष और 2.6 करोड़ महिलाएं पूरी तरह से बेरोजगार है।
भारत में बेरोजगारी

भारत में बेरोजगारी के कारण 

1. दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली
भारत में बेरोजगारी की समस्या का एक कारण भारत की दोष पूर्ण शिक्षा प्रणाली भी रही है। भारतीय भारतीय विद्यालयों में किताबी शिक्षा दी जाती है। भारत की शिक्षा प्रणाली में व्यवहारिक शिक्षा का अभाव रह है। विद्यार्थियों को श्रम का महत्व भी नही बतलाया जाता है जिससे उनमें श्रम करने के प्रति उदासीनता रहती है। 
2. कृषि का पिछड़ापन
भारत एक कृषि प्रधान देश है भारत की अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा भाग कृषि से ही आता है। भारत में ग्रामीण समाज की आजीविका का मुख्य साधन कृषि ही है। लेकिन आज जनसंख्या की अधिकता, खेती को उन्नत करने के लिए पूंजी की कमी। तकनीकी अभाव आदि कारणों से भारत कृषि से पिछड़ रहा है।
3. जनसंख्य वृध्दि
भारत की जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ रही है। विश्व में जनसंख्या के मामले में भारत का दूसरा स्थान है। 2011 की जनगणन के आँकड़ो के मुताबिक 11% यानी की 12 करोड़ लोगों को रोजगार की तलाश है। भारत में जनसंख्या तेजी से बढ़ती जा रही है और खेती दिनों-दिनों छोटी होती जा रही है। खेती पर जनसंख्या का दवाब तेजी से बढ़ रहा है। अगर इसे समय रहते नही रोका गया तो इसके गंभीर परिणाम देखने को मिलगे है।
4. मशीनीकरण
बेरोजगारी को बढ़ने में मशीनीकरण का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जो काम एक व्यक्ति 10 दिन में करता है वह काम एक मशीन 1 घंटे मे कर देती है। इस प्रकार मशीनीकरण भी बेरोजगारी की समस्या का एक प्रमुख कारण है।
5. दोष पूर्ण आर्थिक नियोजन
बेरोजगारी का एक कारण दोष पूर्ण आर्थिक नियोजन का भी होने है। बिजली, सड़क, यातायात, संचार, आदि सुविधाओं की कमी या अभाव के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के लोग नगर की और पलायन करने लगते है जिसके परिणामस्वरूप रोजगार के अवसरों की उपलब्धता में कमी आ जाती है।
भारत में बेरोजगारी को लेकर अगर आपका भी कोई विचार है तो नीचे comment कर जरूर बताए। 

7/31/2019

7/31/2019

अपराध का अर्थ, परिभाषा और कारण

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का https://www.khaskhabr.com में, अपराध हर समाज एवं राष्ट्र के लिए एक गंभीर समस्या है। अपराध की यह प्रक्रिया युगों-युगों से चल आ रही है। जिसमें मे से बाल अपराध की समस्या तो और भी भयावह एवं गंभीर समस्या है। कानूनी दृष्टी कोण अपराध का अर्थ कानून विरोधी कार्य करना ही अपराध है जब यह अपराध को बालक करता है तो उसे हम बाल अपराधी के नाम से जानते है। अक्सर देखा जाता है कि अधिकांश अपराधी किसी कारण वश या मजबूरी में ही अपराध को अंजाम देते है। लेकिन कुछ अपराधी ऐसे भी होते है जिन्हें ना तो सामाज का भय होता है और ना ही राज्य के कानून का ऐसे अपराधी ही गंभीर अपराधों को अंजाम देते है। आज के इस लेख मे हम अपराध की परिभाषा, अपराध का अर्थ और अपराध के कारण के बारें मे चर्चा करेंगे।
अपराध का अर्थ
अपराध

अपराध का अर्थ 

समाजशास्त्री दृष्टिकोण से अपराधी या बाल अपराधी वह है जो समूह द्वारा स्वीकृत किसी कार्य को करने का अपराधी हो, जो अपने विश्वास को लागू करने की शक्ति रखता हो, जिसे समाज हेतु खतरनाक समझकर उसे रोका जाना अवयश्क हो गया हो।

अपराध की परिभाषा

सदरलैण्ड के अनुसार अपराध की परिभाषा; "अपराध सामाजिक मूल्यों के लिये ऐसा घातक कार्य है जिसके लिये समाज दण्ड की व्यवस्था करता है।
अपराध की परिभाषा
डां. सेथना के अनुसार अपराध की परिभाषा; "अपराध कोई भी वह कार्य अथवा त्रुटि है जो किसी विशेष समय पर राज्य द्वारा निर्धारित कानून के अनुसार दण्डनीय हैं।
बर्ट के अनुसार बाल अपराध की परिभाषा; "उन बालकों को बालापराधी कहते हैं जिसकी समाज विरोधी प्रवृत्तियां इतनी गम्भीर हो जाती हैं कि उनके प्रति सरकारी कार्यवाही जरूरी हो जाती है।"

अपराध के कारण 

कोई भी व्यक्ति किसी भी रूप में अपराध क्यों करता है? इसके अनेक कारण हो सकते है। कुछ लोग जन्म से ही अपराधी बन अपराधी होते है तो कुछ लोग परिस्थतियों वश आगे चलकर अपराधी बन जाते है।  अपराध के विषय में मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि व्यक्ति के अंदर हीनभावना का विकास अपराधी भावनाओं को जन्म देता है। अपराध के प्रमुख कारण इस प्रकार है---
अपराध के कारण

1. व्यक्तिगत कारण 
अपराध करने के कुछ व्यक्तिगत कारण भी होते है। जिन व्यक्तियों के माता-पिता अपराधी व्यवहार में संलग्न हो तो उनके बच्चो द्वारा भी अपराध करने की संभावना बड़ जाती है। माता-पिता द्वारा अपने बच्चों अच्छी परवरिश या अवश्यकताओं की पूर्ति न करना या  फिर नैतिक शिक्षा न दे पाना भी अपराध कारण हो सकता है।
2. आर्थिक कारण 
निर्धनता अपराध का सबसे मुख्य कारणों मे से एक है। व्यक्ति अपनी पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करने में अपने आपको जब असर्मथ पाता है तो वह अपराधी गतिविधियों की और बढ़ने लगता है। उदाहरण को तौर पर औद्योगीकरण और नागरीकरण के कारण मलिन बस्तियां पनपती है। ग्रामीण लोग रोजगार के लिए उद्योगों में काम करने के लिये आते है लेकिन कम आय के कारण उनकी पत्नी- बच्चों का भरण-पोषण नही हो पाता और समुचित आवास की व्यवस्था भी नही हो पाती तो स्थानों पर अधिकांशतः अपराधी प्रवृत्ति पनपने लगती है।
3. चलचित्र
चलचित्र मनोरंजन का मुख्य साधन माने जाते है। लेकिन यह व्यक्ति के सामने उच्च आदर्श पेश नही कर पाते। बहुत से लोग सिर्फ अपनी अतृप्त कामुकता को शान्त करने हेतु चलचित्रों में जाते है। इन चलचित्रों में  कई तरह के समाज विरोधी कार्य दिखाये जाते है जिससे व्यक्ति के मस्तिष्क पर इसका बूरा प्रभाव पड़ता है।
 4. शारीरिक विकार 
शारीरिक विकारों में अंधे, बहरे, एवं विकलांगों या विकृत आकृति वाले लोगो को शामिल किया जा सकता है। ऐसे लोगों में हीनता की भावना पनपती है और वह आपराधी गतिविधों की और बढ़ने लगते है।
5. मनोवैज्ञानिक कारण 
अपराध के मनोवैज्ञानिक कारण भी होते है। प्रेम में असफलता, सामाजिक जीवन असफलता, आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने मे असमर्थ होना, परिवार में उपेक्षा, समाज द्वारा बहिष्कार आदि जैसे अनेक कारण है जो व्यक्ति के जीवन को हीनता का बोध करते है। इस कारण व्यक्ति कभी हिंसा तो कभी प्रतिशोध तो कभी मानसिक उद्वेग उसके अपराधी व्यवहार का कारण बन जाता है। 
6. सामाजिक विघटन
 सामाज का निर्माण विभिन्न ईकायों जैसे व्यक्ति, परिवार, समिति, संस्था, समूह आदि से होता है और जब यह अपने दायित्वों का निर्वाह नही करती तो सामाज का विघटन होने लगता है। इस प्रकार सामाजिक विघटन की प्रक्रिया समाज में अपराधों को जन्म देने का बनती है।
आशा करता हूं आपको अपराध का अर्थ, परिभाषा और अपराध के कारण समझ आ गये होगे। अगर आपका इस लेख से सम्बन्धित कोई सवाल या प्रश्न है तो नीचे comment कर जरूर पहुंचे मैं आपके comment का इंतजार कर रहा हूं।

7/29/2019

7/29/2019

व्यवसाय का अर्थ, परिभाषा और विशेषताएं

वैसे तो व्यवसाय शब्द से हम सभी परिचित है। व्यवसाय एक आर्थिक क्रिया है।  जिसमें वस्तुओं का क्रिय-विक्रय क्या जाता है। वास्तविकता मे हम व्यापार को ही व्यवसाय समझते है लेकिन व्यवसाय का एक विशिष्ट अर्थ है।
व्यवसाय का अर्थ

व्यवसाय का अर्थ 

व्यवसाय एक ऐसी आर्थिक क्रिया है जिसमें लाभ कमाने के उद्देश्य से वस्तुओं और सेवाओं का नियमित रूप से उत्पादन क्रय-विक्रय विनियम और हस्तांतरण किया जाता है। व्यवसाय को हम तभी व्यवसाय कहेगें जब उसमे आर्थिक क्रियाओं मे नियमितता हो। व्यसाय मे उन सभी क्रियाओं को सम्मिलित किया जाता है, जिसमें वस्तुओं के उत्पादन से लेकर वितरण तक क्रियाएं की जाती है। व्यवसाय का मुख्य उद्देश्य समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए धन प्राप्त करना होता है।   
व्यवसाय की परिभाषा

व्यवसाय की परिभाषा 

व्यवसाय की परिभाषा मैल्विवन ऐन्सन के अनुसार इस प्रकार है--
"व्यवसाय जीविकोपार्जन का तरीका होता है।
"इस प्रकार व्यवसाय में वे संपूर्ण मानवीय क्रियाएं आ जाती हैं, जो वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन एवं वितरण के लिए की जाती है।
व्यवसाय की विशेषताएं

व्यवसाय की विशेषताएं 

1. व्यवसाय एक मानवीय आर्थिक क्रिया है।
2. प्रत्येक व्यवसाय को समाज और राज्य द्वारा मान्यता प्रदान की जाती है।
3. व्यवसाय लाभ को ध्यान मे रखकर किया जाता है।
4. व्यवसाय में व्यवसाय करने वाले को जोखिम उठाना पड़ सकता है।
5. व्यवसाय के लिए व्यवसायी मे साहस और धैर्यें होने चाहिए।
6. व्यवसाय सिर्फ लाभ के लिए ही नही होता, वरन् दोनों पक्षों के पारस्परिक हित के लिए भी होता है।
7. व्यवसाय में वस्तुओं का उत्पादन, विनिमय, वितरण आदि क्रिया सम्मिलित होती है।
8. व्यवसाय में आर्थिक क्रियाओं में नियमितता होना अनिर्वाय है। 
9. व्यवसाय की सभी क्रय पुनः विक्रय के उद्देश्य से ही की जाती है।
10. व्यवसाय की सभी क्रियाएं राष्ट्र के नियम और कानूनों के मुताबिक ही होती है।
11. उपयोगिता का सृजन करना एवं सृजन में मदद देना दोनों ही व्यवसाय है।
दोस्तों इस लेख में हमने व्यवसाय का अर्थ, परिभाषा और विशेषताओं के बारे मे जाना आशा करता हूं कि आपको व्यवसाय का अर्थ और परिभाषा शीघ्र ही समझ में आ गई होगी। अगर इस लेख या व्यवसाय से सम्बन्धित आपका कोई प्रश्न या सवाल है तो नीचे comment कर जरूर बताएं मै आपके comment का इंतजार कर रहा हूं।