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6/22/2019

यह हैं भूटान के संविधान की 9 विशेषताएं

भूटान
भूटान

प्राकृतिक सुन्दरता से परिपूर्ण भूटान एक छोटा सा देश है। उत्तर मे भूटान की सीमाएं तिब्बत से लगी है तथा दक्षिण में इसकी सीमाएं भारतीय राज्यों असम तथा पश्चिम बंगाल से मिलती है। इसके पूर्व में भारत का अरूणाचल प्रदेश राज्य है तथा पश्चिम मे इसकी भारत के सिक्किम से मिलती है। इस प्रकार भूटान की तीनों सीमाएं भारत से मिलती है। उत्तर मे इसकी सीमाएं चीन-तिब्बत से भी जुड़ी हुई है। भूटान का लगभग 70% हिस्सा वनों से आच्छादित है। देश की ज्यादातर आबादी देश के मध्यवर्ती हिस्सों मे रहती है।
दोस्तो भूटान का संक्षिप्त परिचय के साथ अब हम भूटान के संविधान का संक्षिप्त परिचय के बाद भूटान के संविधान की विशेषताएं जानेंगे।
भूटान का संविधान

भूटान का संविधान 

भूटान सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से तिब्बत से जुड़ा है लेकिन भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियों के मद्देनजर भारत के करीब है। दुनिया के मानचित्र मे भूटान राज्य की अपनी पृथक पहचान है। राजतंत्र पर अटूट आस्था व पाकृतिक परिस्थियों मे जीवन दर्शन का अनुकरण करने इस राज्य का औपचारिक संविधान अभी शिशु अवस्था में है। वर्ष 2008 में लागू भूटान के नए संविधान में केवल 35 अनुच्छेद व चार अनुसूचितयाँ है। इस संविधान द्वारा भूटान में ब्रिटेन की तर्ज पर निरंकुश जनतंत्र के स्थान पर संवैधानिक राजतंत्र को अपनाया है।
भूटान संविधान की विशेषता

भूटान के संविधान की विशेषताएं 

1. लिखित व निर्मित संविधान 
2008 से पहले भूटान मे कोई औपचारिक संविधान नही था। राजतंत्र पर जन सामान्य की आस्था थी। विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के उद्देश्य से राजा ने अपनी इच्छा व्यक्त की कि भूटान राज्य के लिए अब एक औपचारिक संविधान निर्मित किया जाए। भूटान के 2008 के संविधान मे भूटान की सरकार के बुनियादी प्रावधान का उल्लेख किया है।
2. लोकतांत्रिक संवैधानिक राजतंत्र 
भूटान के 2008 के संविधान के अनुच्छेद 1 मे ही कहा गया है कि भूटान एक लोकतांत्रिक संवैधानिक राजतंत्र होगा तथा सम्प्रभु किंगडम है, जिसकी सम्प्रभुता भूटान की जनता मे निहित होगी। ब्रिटेन मे इसी तरह की शासन व्यवस्था है। जिसमें राजा का पद तो है तथा वंश परम्परा से ही शक्तियों का वास्तविक प्रयोग एक सरकार अथवा कार्यपालिका द्वारा किया जाता है।
3. कानून के समक्ष समानता 
कानून के समक्ष सभी नागरिकों को समानता है। भूटान मे नस्ल, लिंग, भाषा, धर्म, या किसी अन्य आधार पर किसी के साथ भेदभाव नही किया जाता।
4. बौध्द धर्म आध्यात्मिक विरासत
भूटान के संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार बौध्द धर्म भूटान की आध्यात्मिक विरासत है जो शान्ति, अहिंसा, तथा सहिष्णुता की इस आध्यात्मिक विरासत की रक्षा करे। भूटान मे बौध्द धर्म को राज्य का पूरा संरक्षण प्राप्त है। बौध्द धर्म के धार्मिक प्रमुख अर्थात जे. खेनपो की नियुक्ति सम्राट द्वारा की जाती है। बौध्द मठों तथा बौध्द संस्थाओं को राज्य से आर्थिक सहायता पाने का अधिकार है।
5. संसदीय व्यवस्था
भूटान में राजा राज्य का प्रधान तो होता है लेकिन राज्य की कार्यपालिका शक्ति मंत्रिपरिषद् मे निहित होती है। जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है।
6. सामाजिक न्याय
भूटान का संविधान उत्पीड़न भेदभाव और हिंसा से मुक्त समाज निमार्ण करने का प्रयास करता है। कानून के समक्ष मानव अधिकारों और गरिमा की सुरक्षा के आधार पर सामाजिक न्याय कायम रखने की कोशिश करता है।
7. आर्थिक नीति का प्रावधान
भूटान का संविधान राज्य के आर्थिक प्रयासों की घोषणा करता है। राज्य के विभिन्न भागों में रहने वाले व्यक्तियों के बीच की असमानताओं धन के संग्रह को कम करने और सार्वजनिक सुविधाओं के न्यायसंगत वितरण को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक नीतियों को विकसित और निष्पादित करने का प्रयास किया गया है।
8. स्वतंत्र एकीकृत न्यायपालिका
भूटान में लोकतांत्रिक सुधारों के साथ ही नागरिकों के अधिकारों की रक्षा तथा विधि के शासन को सुरक्षित करने के लिए एक एकीकृत तथा स्वतन्त्र न्यायपालिका की व्यवस्था की गई है। न्यायधीशों को हटाने की प्रक्रिया कठिन है, जिससे वे सरकार के दबाव के बिना अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकते है। 
9. आपातकाल की व्यवस्था 
भूटान के संविधान के अनुच्छेद 33 के अन्तर्गत भारत की ही तरह आपातकाल की व्यवस्था की गई है। यदि किसी भी समय भूटान की सम्प्रभुता अखण्डता तथा सुरक्षा को खतरा हो तो प्रधानमंत्री को लिखित सलाह पर सम्राट द्वारा राष्ट्रीय आपात कि घोषणा की जा सकती है।
दोस्तो इस लेख मे हमने जानी भूटान के संविधान की 9 विशेषताएं अगर आपका इस लेख से सम्बन्धित किसी भी प्रकार का कोई विचार है तो नीचे comment कर जरूर बताए।

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