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7/31/2019

अपराध का अर्थ, परिभाषा और कारण

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का https://www.khaskhabr.com में, अपराध हर समाज एवं राष्ट्र के लिए एक गंभीर समस्या है। अपराध की यह प्रक्रिया युगों-युगों से चल आ रही है। जिसमें मे से बाल अपराध की समस्या तो और भी भयावह एवं गंभीर समस्या है। कानूनी दृष्टी कोण अपराध का अर्थ कानून विरोधी कार्य करना ही अपराध है जब यह अपराध को बालक करता है तो उसे हम बाल अपराधी के नाम से जानते है। अक्सर देखा जाता है कि अधिकांश अपराधी किसी कारण वश या मजबूरी में ही अपराध को अंजाम देते है। लेकिन कुछ अपराधी ऐसे भी होते है जिन्हें ना तो सामाज का भय होता है और ना ही राज्य के कानून का ऐसे अपराधी ही गंभीर अपराधों को अंजाम देते है। आज के इस लेख मे हम अपराध की परिभाषा, अपराध का अर्थ और अपराध के कारण के बारें मे चर्चा करेंगे।
अपराध का अर्थ
अपराध

अपराध का अर्थ 

समाजशास्त्री दृष्टिकोण से अपराधी या बाल अपराधी वह है जो समूह द्वारा स्वीकृत किसी कार्य को करने का अपराधी हो, जो अपने विश्वास को लागू करने की शक्ति रखता हो, जिसे समाज हेतु खतरनाक समझकर उसे रोका जाना अवयश्क हो गया हो।

अपराध की परिभाषा

सदरलैण्ड के अनुसार अपराध की परिभाषा; "अपराध सामाजिक मूल्यों के लिये ऐसा घातक कार्य है जिसके लिये समाज दण्ड की व्यवस्था करता है।
अपराध की परिभाषा
डां. सेथना के अनुसार अपराध की परिभाषा; "अपराध कोई भी वह कार्य अथवा त्रुटि है जो किसी विशेष समय पर राज्य द्वारा निर्धारित कानून के अनुसार दण्डनीय हैं।
बर्ट के अनुसार बाल अपराध की परिभाषा; "उन बालकों को बालापराधी कहते हैं जिसकी समाज विरोधी प्रवृत्तियां इतनी गम्भीर हो जाती हैं कि उनके प्रति सरकारी कार्यवाही जरूरी हो जाती है।"

अपराध के कारण 

कोई भी व्यक्ति किसी भी रूप में अपराध क्यों करता है? इसके अनेक कारण हो सकते है। कुछ लोग जन्म से ही अपराधी बन अपराधी होते है तो कुछ लोग परिस्थतियों वश आगे चलकर अपराधी बन जाते है।  अपराध के विषय में मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि व्यक्ति के अंदर हीनभावना का विकास अपराधी भावनाओं को जन्म देता है। अपराध के प्रमुख कारण इस प्रकार है---
अपराध के कारण

1. व्यक्तिगत कारण 
अपराध करने के कुछ व्यक्तिगत कारण भी होते है। जिन व्यक्तियों के माता-पिता अपराधी व्यवहार में संलग्न हो तो उनके बच्चो द्वारा भी अपराध करने की संभावना बड़ जाती है। माता-पिता द्वारा अपने बच्चों अच्छी परवरिश या अवश्यकताओं की पूर्ति न करना या  फिर नैतिक शिक्षा न दे पाना भी अपराध कारण हो सकता है।
2. आर्थिक कारण 
निर्धनता अपराध का सबसे मुख्य कारणों मे से एक है। व्यक्ति अपनी पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करने में अपने आपको जब असर्मथ पाता है तो वह अपराधी गतिविधियों की और बढ़ने लगता है। उदाहरण को तौर पर औद्योगीकरण और नागरीकरण के कारण मलिन बस्तियां पनपती है। ग्रामीण लोग रोजगार के लिए उद्योगों में काम करने के लिये आते है लेकिन कम आय के कारण उनकी पत्नी- बच्चों का भरण-पोषण नही हो पाता और समुचित आवास की व्यवस्था भी नही हो पाती तो स्थानों पर अधिकांशतः अपराधी प्रवृत्ति पनपने लगती है।
3. चलचित्र
चलचित्र मनोरंजन का मुख्य साधन माने जाते है। लेकिन यह व्यक्ति के सामने उच्च आदर्श पेश नही कर पाते। बहुत से लोग सिर्फ अपनी अतृप्त कामुकता को शान्त करने हेतु चलचित्रों में जाते है। इन चलचित्रों में  कई तरह के समाज विरोधी कार्य दिखाये जाते है जिससे व्यक्ति के मस्तिष्क पर इसका बूरा प्रभाव पड़ता है।
 4. शारीरिक विकार 
शारीरिक विकारों में अंधे, बहरे, एवं विकलांगों या विकृत आकृति वाले लोगो को शामिल किया जा सकता है। ऐसे लोगों में हीनता की भावना पनपती है और वह आपराधी गतिविधों की और बढ़ने लगते है।
5. मनोवैज्ञानिक कारण 
अपराध के मनोवैज्ञानिक कारण भी होते है। प्रेम में असफलता, सामाजिक जीवन असफलता, आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने मे असमर्थ होना, परिवार में उपेक्षा, समाज द्वारा बहिष्कार आदि जैसे अनेक कारण है जो व्यक्ति के जीवन को हीनता का बोध करते है। इस कारण व्यक्ति कभी हिंसा तो कभी प्रतिशोध तो कभी मानसिक उद्वेग उसके अपराधी व्यवहार का कारण बन जाता है। 
6. सामाजिक विघटन
 सामाज का निर्माण विभिन्न ईकायों जैसे व्यक्ति, परिवार, समिति, संस्था, समूह आदि से होता है और जब यह अपने दायित्वों का निर्वाह नही करती तो सामाज का विघटन होने लगता है। इस प्रकार सामाजिक विघटन की प्रक्रिया समाज में अपराधों को जन्म देने का बनती है।
आशा करता हूं आपको अपराध का अर्थ, परिभाषा और अपराध के कारण समझ आ गये होगे। अगर आपका इस लेख से सम्बन्धित कोई सवाल या प्रश्न है तो नीचे comment कर जरूर पहुंचे मैं आपके comment का इंतजार कर रहा हूं।

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