Breaking

7/14/2019

घरेलू हिंसा पर निबंध

घरेलू हिंसा एक व्यापक सामाजिक समस्या है। भारतीय समाज में पितृसत्तात्मक व्यवस्था के कारण महिलाएं दोयम दर्जे पर  ही रहती है। समाज समयानुसार जैसे-जैसे प्रगति पर उन्मुख हो रहा है वैसे-वैसे समाज में घरेलू हिंसा की प्रवृति भी बढ़ती जा रही है। आज के इस लेख मे हम घरेलू हिंसा पर एक निबंध लिखेंगे जिसमे हम घरेलू हिंसा कारणों के बारें में भी जानेगें।
घरेलू हिंसा मारपीट

घरेलू हिंसा का अर्थ

राज्य महिला आयोग के अनुसार ""कोई भी महिला यदि परिवार के पुरूष द्वारा की गई मारपीट अथवा अन्य प्रताड़ना से त्रस्त है तो वह घरेलू हिंसा की शिकार कहलाएंगे। घरेलू हिंसा वैसे तो परिवार में उत्पन्न किसी भी तरह के लड़ाई झगडें को कहा जा सकता है लेकिन घरेलू हिंसा का अधिकांश महिलाऐ ही शिकार होती है इसलिए हम इस लेख मे महिलाओं की ही अधिक बात करेंगे।
घरेलू हिंसा

घरेलू हिंसा पर निबंध (Essay on Domestic Violence in Hindi)

घरेलू हिंसा में ऐसा किसी भी तरह का व्यवहार शामिल है जिसमें महिला के स्वास्थ्य, सुरक्षा, जीवन तथा सुख से रहने की इच्छा का हनन होता हो। घरेलू हिंसा से बचाने के लिए भारत सरकार ने घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 (domestic violence act 2005) का निर्माण भी किया है। इस अधिनियम को 26 अक्टूबर, 2006 से लागू किया गया है। घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 को महिला आयोग एवं विकास द्वारा संचालित (चलाया जाता है) किया जाता है।
लैंगिक असमानता के व्यवहारिक रूपों को लेकर महिलाओं के विरूध्द क्रूरता महिलाओं पर अत्याचार की अनेक घटनाएं घटित होती रहती हैं। घरेलू हिंसा के कारण अधिकतर मामले फाँसी लगाने के होते है। घरेलू हिंसा का सबसे मुख्य कारण दहेज रहा है, दहेज भौतिक सुख-सुविधाएं बढ़ने के साथ-साथ दहेज लोभियों की मांग भी बढ़ती जा रही है। मौखिक रूप से या भावनात्मक रूप से भी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है जैसे " उपेक्षा कर देना, भेदभाव करना या दहेज न लाने हेतु उसे अपमानित करना, पुत्री का जन्म होने पर उसे ताने देना या अपमानित रकना। अप्रतिष्ठित अपमानजनक टिप्पणी करना, हंसी उड़ाना, निंदा करना आदि अनेक बाते शामिल है। घर परिवार में ही महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। अक्सर छोटी-छोटी बातों पर ही उन्हें मारपीट का शिकार होना पड़ता है। पुलिस थानों मे मानसिक तथा शारीरिक प्रताड़ना देने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। गरीब अशिक्षित वर्गों में प्रताड़ना के मामले अधिक होते हैं। यद्यपि हमारे भारतीय संविधान में महिला समानता के लिए प्रावधान किए गए हैं, किन्तु विडंबना यह है कि लोकतंत्रात्मक देश मे अधिकांश महिलाए घर के अंदर ही लोकतंत्र नहीं पाती।
महिलाओं के साथ हिंसा

घरेलू हिंसा के प्रमुख कारण

1. महिलाओं का असक्षित होना।
2. पति का शराबी होना।
3. पुरूष की आराम की लत होना।
4. महिला के चरित्र पर संदेह होना।
5. महिला का सरल स्वाभाव का होना
6. महिलाओं की पुरूषों पर आर्थिक निर्भरता का होना।
7. महिला को स्वावलंबी बनने से रोकना।
8. समाज मे दहेज प्रथा का होना।
घरेलू हिंसा की तस्वीर
उक्त बातों के आधार पर यह स्पष्ट हो जाता है की मारपीट करना, थप्पड़ मारना, ठोकर मारना, धकेलना, गन्दी तस्वीरे देखने के लिए विवश करना, अपमानित करना, गालियाँ देना, पुत्री होने पर महिला को अपमानित करना, नौकरी छोड़ने के लिए विवश करना तथा आत्महत्या करने की धमकी देना, साधारण घरेलू उपयोग के कपड़ो, वस्तुओं अथवा चीजों के इस्तेमाल की अनुमति न देना ही घरेलू हिंसा है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें