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7/24/2019

जनजाति की प्रमुख समस्याएं

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का https://www.khaskhabr.com में, जनजाति या अनुसूचित जनजाति वर्तमान समाज में अपने अस्तित्व के लिए अनेक चुनौतियों का सामाना कर रही हैं। भारत सरकर ने जनजाति के उत्थान के लिए कई कदम उठाए है एवं इनके उत्थान के लिए वर्तमान में भी प्रयासरत् है। लेकिन इसके बाद भी भारतीय जनजातियाँ आर्थिक, सामाजिक रूप से काफी अविकसित है। भारतीय जनजातियों का आधुनिक सभ्यता के संपर्क में आने से सदैव कर्जदार की स्थिति बनी हुई है। वह इस कर्जदारी से इसलिए भी मुक्त नही हो पाते क्योंकि उसके द्वारा उत्पादित अथवा उसने द्वारा इकट्ठा की गयी वन वस्तुओं का उसे उन्हें मूल्य नहीं मिल पाता जितना उसको मिलना चाहिए।  हम पिछले लेख मे यह भी पढ़े, जनजाति का अर्थ,परिभाषा और विशेषताएं जाना चुके है, अगर आपने अभी तक इस लेख को नही पढ़ा है तो लाल लाइन वाले अक्षरों पर क्लिक कर आप पढ़ सकते है।
जनजाति
इस लेख में हम केवल हम जनजाति या अनुसूचित जनजाति की समस्याओं के बारे में ही निबंध की तरह चर्चा करेंगे।
जनजातियों में अल्प विकास से जुड़ी बीमारियां कुपोषण, संक्रामक रोग, मातृ व बाल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी बहुत ही अधिक पायी जाती है।
जनजाति समाज
अंग्रेजों द्वारा भारत में एक समान राजनीतिक व्यवस्था लागू की गई थी, जिससे इनके परंपरागत अधिकार छिने गये और यह सिलसिला निरंतर जारी है। कभी विकास की गतिविधियों के कारण तो कभी संपर्क के कारण जनजातियों की समस्याएं बढ़ती गई।

जनजाति की समस्याएं इस प्रकार है

1. भूमि से अलग होना 
जैसा की हम जानते है जनजातियां आज भी सभ्य समाज से दूर जंगलों और पर्वतों में अधिक निवास करती है। जनजातियों की प्रमुख समस्या भूमि से अलग हो जाने की रही है। प्रशासनिक अधिकारी, वन विभाग के ठेकेदार, महजानों इत्यादि के प्रवेश से उनका शोषण प्रारंभ हुआ है।
2. अशिक्षा
जनजाति के लोग शिक्षा से काफी पिछड़े हुए है यह लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने की वजाए खेतों में काम कर वाना अधिक पसंद करते है। यही कारण है की भारत सरकार के अनेक प्रयासों के बावजूद यह समाज आज भी अशिक्षित है। 2001 एक में जनजातियों के लोग 47.1 प्रतिशत शिक्षित थे। बर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जनजातियों के लोग 59 प्रतिशत शिक्षित है यानी आज भी 41 प्रतिशत लोग अशिक्षित है।
3. बंधक मजदूर 
ॠणग्रस्तता, अज्ञानता आदि कारणों से यह लोग बंधक मजदूर बन जाते है। इनमें केवल एक व्यक्ति ही नही होता बल्की उसका पूरा परिवार ही मानो बंधक बन जाता है।
4. बेरोजगारी
जनजातियों की आजीविका के परंपरागत स्त्रोत सीमित होते है। जिससे इनमें बेरोजगारी की समस्या बनी रहती है। यह लोग शिक्षित बहुत ही कम बहुते है इसलिए इन लोगों को कोई अच्छा काम भी नही मिल पाता है।
5. निर्धनता
जनजातीय समुदायों में निर्धनता की स्थिति उनके अस्तित्व के लिए संकट पैदा करती है।  इनकी आजीविका का मुख्य साधन कंद, मूल, शिकार, जलाने की लकड़ियां तथा छोटी मोटी झोपड़ियों तक ही सीमित है। आर्थिक रूप से यह लोग काफी पिछड़े हुए है।
6. ऋणग्रस्तता
जनजाति की ऋणग्रस्तता की समस्या काफी गंभीर समस्या रही है।  जनजातियाँ अपनी उपभोग की सीमित आवश्यकताओं के साथ प्रकृति पर ही निर्भर रहते हुए सरल जीवन जीवन जीते थे, लेकिन बाहरी सामाज या सभ्य समाज के संपर्क मे आने से इन सामाजिक एवं संस्कृति परिस्थिति में बदलाव होने लेगे है। अच्छे वस्त्र, सौंदर्य, खान-पान आदि के कारण भी इन्हें धन आवश्यकता महसूस होने लगी है।
इसके अलाव इन लोगों की अल्प आय ज्यादातर बीड़ी, सिगरेट, शराब आदि में खर्च हो जाती है। इन सब की अब इन लोगों को आदत हो चुकी है, विवाह तथा किसी सार्वजनिक उत्सवों में भी यह लोग शराब को प्रमुखता देते है। इन लोगों की जीवन भर की कमाए खाने-पाने में ही निकल जाती है और जनजातियों की ऋणग्रस्तता की समस्या बनी रहती है।
7. नशे की लत 
जनजातियों में शराब, बीड़ी, तम्बाकू आदि का चलन बहुतायत पाया जाता है। इनका नशा करना इनकी आदत चुकी है। जनजाति के लोगों में परंपरागत रूप से देशी शराब को प्रसाद के रूप में देवताओं को आर्पित करने व प्रसाद स्वरूप इसे ग्रहण करने की परंपरा है। आदिवासियों में पुरूष ही नही बल्कि महिलाएं भी शराब का सेवन करती है।
8. प्राकृतिक आपदाएं 
प्राकृतिक आपदाएं भी जनजातियों की समस्याएं रही है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण स्थायी या अस्थायी रूप से इन्हें अपने मूल स्थान से दूर जाने के लिए विवश कर देती है।
दोस्तों जनजातियों की प्रमुख समस्याओं को लेकर अगर आपका कोई विचार या सवाल है तो नीचे comment कर जरूर पहुंचे।

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