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7/20/2019

सहकारिता का अर्थ, महत्व (भूमिका)

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का https://www.khaskhabr.com में,  भारत में सहकारिता आन्दोलन की शुरूआत बीसवीं सदी के प्रारंभिक वर्षो में हुई थी। उस समय देश में अकाल पड़ा था। जिसके परिणामस्वरूप किसान गरीब ॠण के दुष्चक्र में फँस थे। भारत जैसे आर्थिक रूप से पिछड़े हुए देश में सहकारिता का महत्व अत्यधिक है।
सहकारिता का अर्थ

सहकारिता का अर्थ 

सहकारिता से अभिप्राय सह+कार्य अर्थात मिलकर कार्य करने से है। शाब्दिक दृष्टि से सहकारिता का अर्थ मिलजुलकर काम करना है। सहकारिता के अन्तर्गत दो या दो से अधिक साथ मिलकर काम करने वाले व्यक्ति आते है। कोई भी मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति अकेले नहीं कर सकता। उसे अन्य लोगों के सहयोग की आवश्यकता जरूर होती है एक-दूसरे को सहयोग करने से ही सहकारिता का जन्म होता है।
सहकारिता के संस्थागत आधार को जानने के लिए सहकारिता की परिभाषा को जान लेना जरूर है।

सहकारिता की परिभाषा 

अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार; " एक सहकारी समिति समान आर्थिक कठिनाइयों का सामाना करने वाले ऐसे व्यक्तियों का संगठन है जो समान अधिकारों तथा उत्तरदायित्वों के आधार पर स्वेच्छापूर्वक मिलकर उन कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास करते है।"
एम. प्लंकेट के शब्दों मे; "सहकारिता संगठन द्वारा प्रभावशाली बनाई गई आत्म सहायता है।"
सहकारिता के लाभ को स्पष्ट करने हेतु अब हम सहकारिता के महत्व को जानेंगे।
सहकारिता का महत्व

सहकारिता का महत्व (भूमिका)

सहकारी आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य कृषकों, ग्रामीण कारीगरों, भूमिहीन मजदूरों एवं समुदाय के कमजोर तथा पिछड़े वर्गों के कम आय वाले और बेरोजगार लोगों को रोजगार, साख तथा उपयुक्त तकनीकी प्रदान कर अच्छा उत्पादक बनाना है। सहकारिता का महत्व इस प्रकार है......
1. आर्थिक विकास में सहायक 
सामूहिक रूप में किए उत्पादन वृध्दि की संभावनाएं अधिक होती है। सहकारी संस्थाएं कृषकों को कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराती है। सहकारिता के कारण कृषि लागत में कमी आई है तथा बेरोजगारी पर अंकुश भी लगा है।
2. धन का सदुपयोग 
सहकारिता समितियां कृषकों को कृषि कार्यों हेतु ही ॠण देती है। किसान साहूकारों और महाजनों से विवाह उत्सव और मृत्यु भोज आदि कार्यों के लिए अधिक ब्याज दर पर ऋण लेते थे लेकिन सहकारी सहमितियां किसान को कृषि कार्यों हेतु ही ऋण देती है इस तरह धन का सदुपयोग होता है।
3. सामाजिक विकास में सहायक 
सहकारिता से लोगों में सहयोग की भावना संचार हुआ है। वे मताधिकार तथा पदों एवं अधिकारों-कर्तव्यों के महत्व को समझने लगे है। सहकारिता से सामाजिक चेतना मे वृध्दि हुई है।
4. सामाजिक बुराईयों को दूर करने में सहायक
सहकारिता आन्दोलन ने अशिक्षा, अज्ञानता, अंधविश्वास तथा बेरोजगारी की समस्याओं को दूर करने में अपना बहुत बड़ा योगदान दिया है।
5. शिक्षा और प्रशिक्षण
सहकारिता ने औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ सहकारी नियमों की जानकारी, संगठन की कला और सामुदायिक शिक्षा जैसी अनौपचारिक शिक्षा की व्यवस्था सहकारिता आन्दोलन ने की है।
सहकारिता
इन सब के अतिरिक्त सहकारिता का प्रजातांत्रिक मूल्यों के विकास, नैतिक गुणों का विकास,  मध्यस्थों के शोषण से मुक्ति, राजनीतिक चेतना के विकास मे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्पष्ट होता है की सहकारी समितियां ग्रामीण पुनर्निर्माण एवं विकास का आधार रही है।
अगर आपका सहकारिता से सम्बन्धित या इस लेख से सम्बन्धित किसी भी प्रकार का कोई विचार है तो नीचे comment कर जरूर बताएं।

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