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7/27/2019

सहकारिता की 12 विशेषताएं

सहकारिता
सहकारी समिति व्यक्तियों की ऐसी स्वायत्त संस्था है जो संयुक्त स्वामित्व वाले और लोकतांत्रिक आधार पर नियंत्रित उद्यम के जरिए अपनी सामाजिक, आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्वेच्छा से एकजुट होते है।
भारत में सहकारी प्रयासों की औपचारिक शुरूआत सन् 1904 में ही हो गई थी। राष्ट्रीय सहकारिता संघ (NCUI) की स्थापना सन् 1929 में सहकारी आन्दोलन के शीर्ष संस्थान के रूप मे की गई थी।
सहकारिता की विशेषताएं
भारत जैसे आर्थिक रूप से पिछड़े हुए देश में सहकारिता एवं सहकारी समितियाँ अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है क्योंकि छोटी-मोटी आवश्यकताओं की पूर्ति सहकारी समितियों से जितनी सरलतापूर्वक होती है उतनी सरकारी मशीनरी के द्वारा नहीं होती है।

सहकारिता की विशेषताएं 

 1. सहकारिता लाभ के स्थान पर सेवा को अधिक महत्व देता है।
2. सहकारिता के संगठन का आधार प्रतिस्पर्द्धा नही बल्कि पारस्परिक सहयोग है। सहकारी समितियों की पूंजी सामूहिक होती है।
3. सहकारिता एक सबके लिए और सब एक लिए के सिध्दांत पर लागू है।
4. प्रत्येक सहकारी संगठन का मुख्य उद्देश्य व्यवसाय चलाना होता है। यह व्यवसाय किसी भी रूप में हो सकता है।
5. सहकारिता के संगठन की सदस्यता ऐच्छिक होती है। इस संगठन का सदस्य व्यक्ति अपनी इच्छा से बनता है और अपनी इच्छा से उसे छोड़ सकता है।
6. सहकारिता के सदस्य समानता व पारस्परिक सहयोग के आधार पर कार्य करते है।
7. सहकारिता न्याय और समानता के सिध्दांतों पर आधारित है।
8. सहकारिता एक स्वचालित सामाजिक-आर्थिक आन्दोलन है।
9. सहकारी संस्थाएं अपने सदस्यों को शोषण से बचाने तथा उनके अधिकतम कल्याण के लिए बनाई जाती है।
10. सहकारिता नैतिक एकता के बंधन को सुदृढ़ बनाती है।
11. सहकारिता उत्पादन और वितरण में प्रतियोगिता, शोषण और बिचौलियों को समाप्त करने का एक साधन है।
12. सहकारी आन्दोलन कमजोर आर्थिक स्थिति वाले लोगों को संयुक्त रूप से कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करता है।
तो दोस्तों यह थी सहकारी आन्दोलन (सहकारिता) की 12 विशेषताएं, सहकारिता को लेकर या इस लेख के सम्बन्धित आप का किसी प्रकार का कोई विचार है तो मुझे नीचे comment कर जरूर बताएं, धन्यवाद।

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